17 जुलाई, 2019

कलेक्टर के आदेश से हैरान हुआ किसान भेज रहे थे पागल खाने पर देर रात विचार बदला और छोड़ दिया


  कलेक्टर के आदेश से हैरान हुआ किसान 
 भेज रहे थे पागल खाने पर देर रात विचार बदला और छोड़ दिया 
छतरपुर ( रवीन्द्र व्यास)






 मंगलवार को जनसुनवाई में  विकलांग  किसान जिला कलेक्टर से फरियाद कीकि उसकी जमीन पर उसे कब्जा दिलाया जाये।   पिछले 15 वर्षों से अपनी जमीन को दबंगो से मुक्त कराने के लिए फरियाद कर रहा है पर कोई कार्यवाही नहीं हुई ।  तहसील न्यायालय के आदेश के बाद भी  उसकी जमीन को  पुलिस मुक्त नहीं करा पायी । अब अगर  जमीन नहीं मिली तो उसका पूरा परिवार आत्महत्या कर लेगा। 
राजनगर तहसील क्षेत्र के देवगाव का विकलांग किसान शंकर पटेल कलेक्टर छतरपुर को   फरियाद सुनाने जन सुनवाई में  गया था। शंकर पटेल ने अपने आवेदन में  उल्लेख किया कि उसके पास 4.450 हेक्टेयर कृषि भूमि है जो उसके नाम पर राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है। गाँव के दबंग  शिवचरण, स्वाममीदीन  और अन्य लोगों ने लंबे समय (15 वर्ष या अधिक) से इस भूमि का अतिक्रमण किया है। मैंने यह मामला राजनगर तहसीलदार के राजस्व न्यायालय में दायर किया था। 5 जुलाई 2019 को तहसीलदार ने बमीठा पुलिस थाने के अधिकारी को निर्देश दिया कि वे इस अतिक्रमण को खाली करा  दें और शंकर को जमीन का कब्जा दे दें। अभी तक पुलिस ने इस संबंध में कोई कदम नहीं उठाया हैजिसके कारण वह अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ गंभीर स्थिति में है। अगर मेरी जमीन नहीं लौटाई गई तो मैं अपने पूरे परिवार के साथ आत्महत्या कर लूंगा।  
जैसे ही किसान ने अपना आवेदन प्रस्तुत कियाकलेक्टर ने उपस्थित अधिकारी को उसे जिला अस्पताल ले जाने का निर्देश दिया। अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने किसान का निरीक्षण किया और उसकी राय के लिए उसे ग्वालियर रेफर कर दिया। इस बीच रोती हुई अवस्था में किसान पत्नी भी अस्पताल पहुंची लेकिन कोतवाली पुलिस ने किसान को मेडिकल परीक्षण के बाद थाने ले गई। हालांकि रात में किसान को फिर से पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाया गया,  जहां से उससे  लिखित लिया गया कि  वह ग्वालियर नहीं जाना चाहते। बाद में उसे उसकी पत्नी और बच्चों को सौंप दिया गया।  
शंकर पटेल ने बताया कि उन्होंने मुझे पागल घोषित कर दिया हैबहुत उम्मीद के साथ मैं अपने पक्ष में राजस्व अदालत के मामले के बावजूद अपनी कृषि भूमि से अतिक्रमण खाली करने की याचिका के साथ जनसुनवाई में पहुंचा था। मैंने लिखा था कि यदि आप अतिक्रमण खाली नहीं कर सकते हैं तो मैं अपने परिवार के साथ आत्महत्या कर लूंगा। कलेक्टर ने मेरा आवेदन देखा और मेरी बात सुने बिना कर्मियों को मुझे अस्पताल ले जाने का आदेश दियामेरी मेडिकल जांच की गई और फिर मुझे कोतवाली पुलिस को सौंप दिया गया। रात में  मुझे फिर से अस्पताल ले जाया गया था  मुझसे लिख्या गया था कि में पूर्णतः स्वस्थ हूँ और ग्वालियर नहीं जाना चाहता हु | 

 सिविल सर्जन डॉ। आरएस पांडेय ने मीडिया को बताया था कि पुलिस के साथ एसडीएम ने किसान को लाया था जो अपनी मेडिकल जांच के लिए जनसुनवाई में आत्महत्या की बात कह रहा था। मेडिकल बोर्ड ने उनकी जाँच की और उन्हें शारीरिक रूप से स्वस्थ पाया गया लेकिन हमारे पास मनोचिकित्स्क  नहीं है इसलिए हमने उन्हें सलाह  के लिए ग्वालियर रेफर किया है।
छतरपुर कलेक्टर मोहित बुंदास ने मीडिया को  बताया कि किसान अपने आवेदन के साथ आया था | उसे अकेला छोड़ना जोखिम भरा था क्योंकि वह उत्तेजित मूड में था इसलिए मैंने उसे चेकअप के लिए अस्पताल भेजा था।
 मनोरोगियों की सेवा में समर्पित एडवोकेट संजय शर्मा ने बताया कि आउटडोर में मेंटल हॉस्पिटल किसी को भी दिखाया जा सकता परंतु उस बिना परिवार के कई महीनों तक भर्ती करना है तो न्यायिक मजिस्ट्रेट आदेश चाहिए आउटडोर मैं तो किसी को भी एक-दो दिन 10 दिन के लिए डॉक्टरों की सलाह पर भारती किया जा सकता है। मेटल हास्पीटल में भर्ती करने की भी एक प्रक्रिया हैएसा नहीं कि कोई किसी को भी पागल कह दे या बना दे और उसे पागल खाने में भर्ती कर देइसके लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट को पावर हैवह भी मेडिकल बोर्ड के प्रमाण पत्र देखते हैं ।और यदि गलत तरीके से पागल खाने में भर्ती कर दिया जाता है तो उसके लिए भी कानून है ।
  
शंकर पटेल की  पत्नि लल्लाबाई पटेल ने बताया कि उसका पति पूरी तरह स्वस्थ हैं और न्याय के लिए भटक रहा हैं। प्रशासन उसे न्याय दिलाने की बजाय पागल घोषित करने पर तुला है और जबर्दस्ती उन्हें ग्वालियर इलाज के लिए भेजा जा रहा है। हमारे परिवार को इस तरह परेशान किया जा रहा है कि हम अब आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं।

कलेक्टर के इस  आदेश से  किसान ही नहीं जिले के सामाजिक संगठनों के लोग  हैरान रह  गए | खैर बाद में प्रशांसन को सद्बुद्धि आई और जिसे  भेज रहे थे पागल खाने पर देर रात विचार बदला और छोड़ दिया | 
इस मसले पर छतरपुर के कांग्रेस विधायक आलोक चतुर्वेदी ने तीखी प्रतिक्रया व्यक्त की है , उन्होंने इस घटना को दुर्भाग्य पूर्ण बताते हुए मामले की पुनरावृत्ति ना हो इसकी व्यवस्था करने की बात कही है.

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