बुंदेलखंड की डायरी
चुनावी सियासत में प्रत्यशियों का पलायन
रवीन्द्र व्यास
बुंदेलखंड में सियासत के समीकरण नित नए रंगों से सराबोर हो रहे हैं | लोग रोजगार की तलाश में पलायन कर गए हैं , तो वहीँ दलों के नेता अपनी राजनैतिक महत्वाकांछाओं की पूर्ति के लिए पलायन की जुगत में जुटे हैं | इन सब के बीच बुंदेलखंड के असल मुद्दे कहीं दफ़न होते जा रहे हैं | नेताओ का लोक संपर्क अभियान तो तेज होता ही जा रहा है ,| सपाक्स की आंधी को रोकने के लिए एक नया प्रचार तंत्र विकसित किया जा रहा है | दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके से अलग बुंदेलखंड राज्य की मांग को लेकर आंदोलन तेज होता जा रहा है |
पन्ना जिले के पूर्व को आप बैंक अध्यक्ष संजय नगायच ने पवई विधानसभा क्षेत्र के लोगों से अपील की हैं कि आगामी चुनाव में मतदान पार्टी को देखकर नहीं प्रत्याशी की छवि, सक्रियता, विधायक की उपलब्धता और क्षेत्रीयता को प्राथमिकता देकर करें | उन्होंने लोगों को समझाइस दी है कि पार्टियों गिरोह और जागीर बन गई हैं जो कथित नेता और कार्यकर्ता विधायक और मंत्रियों की चापलूसी करते हैं वही पार्टियों के अब जिम्मेवार कार्यकर्ता और पदाधिकारी माने जाने लगे हैं, परिश्रमी और पराक्रमी कार्यकर्ता नेता नहीं l*
उन्होंने लोगों के सामने सवाल रखा कि क्या विधायक और मंत्री महीने दो महीने में सिर्फ 1 दिन के लिए पिकनिक दौरे पर आने के लिए होता है ?? इतने कम समय में क्षेत्र की समस्याओं को समझ सकता है क्या ?? तो स्वभाविक है वह चमचों और चापलूसों के चश्मे से ही क्षेत्रवासियों को देखेगा | जनता की समस्याओं, जनता से संवाद से उनका ज्यादा लेना-देना नहीं होगा l
*क्षेत्र का कितना विकास हुआ ? कितने लोगों को रोजगार मिला ? विकास के कौन कौन से साधन संसाधन हैं जिनसे हमारे क्षेत्र के लोगों को रोजगार मिले ? किसानों को खेती किसानी में कितना फायदा मिला हम हरियाणा और पंजाब जैसे कितनी उन्नतिशील खेती कर रहे हैं ? युवाओं को क्षेत्र में अच्छी शिक्षा के कितने अवसर और कितने युवाओं को रोजगार मिला ? विकास के नाम पर सुदूर कल्दा, शाहनगर, रैपुरा, सुनवानी क्षेत्रों की हालत तो बहुत खराब है विधानसभा मुख्यालय तहसील और विकासखंड मुख्यालय पवई, सिमरिया और शाहनगर रेपुरा के आसपास ही मूलभूत व्यवस्थाएं सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य में क्षेत्र की बदहाली देश और प्रदेश के सबसे पिछड़े विधानसभा क्षेत्र में है आधे से ज्यादा गांव में बिजली नहीं पहुंची अगर बिजली पहुंची तो तार नहीं है ट्रांसफार्मर नहीं है, सड़कों की हालत जर्जर है, साफ और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था नहीं है, क्षेत्र के सीमित गांव में नल जल योजना है और वह भी आधी अधूरी है अथवा बंद पड़ी है हैंड पंप खराब हैं, स्कूलों में पूरी विधानसभा में एक भी हाई सेकेंडरी हाई स्कूल में पूर्णकालिक प्रिंसिपल नहीं है कामचलाऊ प्रभारी प्रिंसिपल और अतिथि शिक्षकों के भरोसे और वह भी आधे अधूरे स्कूल रो रहे हैं,|
कॉलेजों के नाम पर खिलवाड़ शाहनगर और पवई के महाविद्यालयों में प्रोफ़ेसर ही नहीं है व्यक्ति निर्माण करने वाली और संस्कार देने वाली शिक्षा की बदहाली की यह हालत है ग्रामीण क्षेत्रों में शायद ही कोई 10वीं 12वीं पास करके कॉलेज में विद्यार्थी जाते हो ?? जनकल्याणकारी योजनाओं मैं लापरवाही भ्रष्टाचार का यह आलम है वह भी शासन की अतिमहत्वकांक्षी जन कल्याणकारी योजनाएं के नाम पर, चाहे वह प्रधानमंत्री आवास हो, चाहे शौचालय हो अथवा निराश्रित गरीब और विधवा पेंशन सभी में भारी गोलमाल है गरीबों को मिलने वाला राशन हो उसमें जबरदस्त भ्रष्टाचार और लूट मची हुई है इन सबके लिए किसी जनप्रतिनिधि और विधायक को फुर्सत नहीं l*
इसलिए अब हम सबको सजग और जागरूक होना होगा और अपने स्वाभिमान को जगाना होगा | जब हम बाजार में एक माचिस, साबुन भी खरीदने जाते हैं तो उसकी विशेषता पूछते हैं तभी लेते हैं, एक शर्ट पेंट भी खरीदते हैं तो 10 बार इधर उधर से उसको देखते हैं परंतु हम अपने क्षेत्र का भविष्य जिसके हाथों में दे रहे हैं , विधायक बनाकर क्षेत्र के सेवक की अहम जिम्मेवारी जिसको दे रहे हैं उसको ठोक-बजाकर देखते हैं क्या ??*
*फिर जिस विधायक को हमने 5 साल के लिए वोट दिया और वह भी सेवक बनने के लिए जो अब शासक बन गया है तो क्या हम उसका लेखा-जोखा हिसाब किताब लेते हैं कि वह अपने वायदों पर कितना खरा उतरा ? उसने चुनाव के पहले क्या आश्वासन और विकास के वादे किए थे हम उनकी समीक्षा क्यों नहीं करते क्योंकि लोकतंत्र में यही हमारी सबसे बड़ी ताकत है मतदान करने की और उससे जनप्रतिनिधि बनाने की सरकारें बनाने की और गिराने की भी l*
दरअसल संघ और बीजेपी के प्रति समर्पित रहने वाले संजय नगायच द्वारा उठाये गए मुद्दे बुंदेलखंड और प्रदेश की अधिकाँश विधान सभा सीटों पर लागू होते हैं | चुनाव के समय नेता जी के चाल चरित्र और चेहरे में अपनत्व का ऐसा मिश्रण प्रगट होता है मानो इनसे बड़ा हमारा कोई हितेषी नहीं है | चुनाव में जिन मतदाताओं की चरण रज लेकर नेता जी अपने को धन्य मानते थे जीतने के बाद अपनी चरण रज देकर लोगों पर कृपा करते हैं | चुनाव के समय क्या वायदे किये थे कितने पूर्ण हुए कितने अपूर्ण यह जानने और समझने का शायद लोगों के पास अब वक्त रहा नहीं |
पलायन
बुंदेलखंड में पलायन एक स्थाई नियति बन गई है , लोगों को रोजगार की तलाश में पलायन करना एक तरह से मज़बूरी और जरुरत बन गई है | चुनावी मौसम में पलायन का यह क्रम सियासत में भी तेज हो जाता है | पलायन का यह क्रम तब शुरू होता है जब टिकिट वितरण का दौर शुरू हो जाता है , और जब नेता जी को टिकिट नहीं मिलता तो वे उस पार्टी में ठिकाना तलाशने लगते हैं जिसे वो जीवन भर गालिया देते हैं | ऐसी ही कुछ हलचल छतरपुर जिले में देखने को मिल रही है , कांग्रेस के कई नेता इन दिनों बीजेपी के आला नेताओं के संपर्क में हैं | इन नेताओ की सौदे बाजी इस बात को लेकर हो रही है कि पार्टी टिकिट देगी अथवा नहीं | टिकिट का आश्वासन मिलते ही ये पंजा वाले कमल छाप अपने दल बल के साथ हो जाएंगे | हालांकि इस कतार में बीजेपी के भी एक बड़े नेता जी हैं जो अपनी मूल पार्टी में फिर वापस जाना चाहते हैं , सवाल फिर टिकिट पर आकर अटका है |
मुद्दों से बेरुखी
पिछले दिनों केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके में राष्ट्रीय राजमार्ग विकसित करने और बुंदेलखंड कॉरिडोर बनाकर रक्षा उत्पादों के लिए योजना तैयार की है | मध्य प्रदेश के फेडरेशन आफ मध्य प्रदेश चेम्बर्स आफ कॉमर्स एन्ड इंडस्ट्रीज ने बुंदेलखंड कॉरिडोर में मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके को जोड़ने की मांग की है | फेडरेशन ने केंद्रीय रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखा है ,वहीँ मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान को ज्ञापन सौंपा है | असल में बुंदेलखंड के विकाश के लिए बुंदेलखंड में औद्योगिक कॉरिडोर बनाने का निर्णय केंद्र की मोदी सरकार और उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने लिया था | सुरक्षा जरुरतो को ध्यान में रख कर केंद्र ने इस कॉरिडोर में रक्षा उत्पादों के उद्योग लगाने का फैसला किया है | इस कॉरिडोर में उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड के सभी सातों जिलों को जोड़ा गया है | यह चर्चा लगभग दो वर्ष से चल रही है , पर चुनावी बिसात में व्यस्त मध्य प्रदेश सरकार को इस बात की फुर्सत ही नहीं थी , और ना मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके के मंत्रियों और विधायकों को इस बात की फुर्सत थी की वे विकाश के इस महत्वपूर्ण अवसर का लाभ उठाते |
जबकि मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके के जिओग्राफिक हालातों को देखा जाए तो , उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके की तुलना में मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके की अधिकाँश भूमि पथरीली और कम उपजाऊ है | ऐसे स्थानों पर उद्योगं के विकाश से उपजाऊ भूमि को भी बचाया जा सकता है |
उमा भारती के मुख्यमंत्रित्व काल में बुंदेलखंड के विकाश के लिए एक विशेष योजना तैयार की जा रही थी | इसके लिए बुंदेलखंड से सम्बद्ध आई ए एस रविंद्र पस्तोर को जिम्मेदारी सौंपी गई थी | उन्होंने पन्ना जिले के कल्दा और छतरपुर जिले के किशनगढ़ इलाके को मिलाकर आदिवासी उप क्षेत्र बनाने की योजना के साथ ,छतरपुर को संभाग बनाने और बुंदेलखंड के पर्यटक स्थलों के विकाश वाटर स्पोर्ट्स के लिए योजना तैयार की थी | लोगों को रोजगार के लिए जंगल ,कृषि और कुटीर आधिरत उद्योगों की पहल की थी | साथ ही बुंदेलखंड के प्राचीन बुनकर उद्योगों को फिर से खड़ा करने और उनके माल की खपत की योजना तैयार की थी | उमा भारती के जाने के बाद ना यहां के विधायकों को और ना यहां के सांसदों को यह जानने की फुरसत रही की उमा भारती के समय तैयार योजनाओ का क्या हुआ |
अलगाव की आवाज :
बुंदेलखंड को अलग राज्य बनाने के लिए चुनाव के समय आंदोलन तेज हो जाते हैं | २०१८ के मध्यप्रदेश विधान सभा चुनाव और २०१९ के लोकसभा चुनावों को देख कर अलग राज्य की आवाज तेज होती जा रही है | 17 सितम्बर से झांसी में हर दिन आंदोलन धरना प्रदर्शन का क्रम जारी है | इस बार बुंदेलखंड राज्य की मांग कर रहे सभी दल इसके लिए एक साथ लामबंद हुए हैं |
सपाक्स का संघर्ष
सवर्ण और पिछड़ा वर्ग एस सी और एस टी एक्ट को लेकर सरकार द्वारा जारी किये गए अध्यादेश से खफा है | बुंदेलखंड की आठ लोक सभा सीटों और मध्य प्रदेश की २६ विधान सभा सीटों को देखा जाए इन सब क्षेत्रो में सवर्ण और पिछड़े वर्ग का प्रतिशत 74 से 80 फीसदी है | जाहिर है बुंदेलखंड की हर सीट पर सपाक्स प्रभावी है | सपाक्स के इस समीकरण को देख अब योजनाबद्ध तरीके से यह प्रचारित किया जा रहा है कि बुंदेलखंड में सवर्ण ,अल्प संख्यको ,और पिछड़ा वर्ग 50 फीसदी से कम है | बीजेपी के इस अभियान में देश के जाने माने समाचार पत्र समूह अहम् भूमिका अदा कर रहे हैं |




