28 मई, 2018

बुंदेलखंड मे जल के लिए जद्दोजहद


बुंदेलखंड की डायरी 

जल की जद्दोजहद में जूझते बुंदेलखंड गाँव 

रवीन्द्र व्यास

वर्षा का अभाव , आग उगलता सूरज , तपती धरा , धरा का सूखा पानी ,  सूख रही आँखों की नमी  , बेहाल बुंदेलखंड की यही स्थाई   नियति बन गई है  |  पिछले दिनों  झाँसी में  गाँव गाँव से पहुंचे लोगों ने पानी की समस्या को लेकर ना सिर्फ प्रदर्शन किया बल्कि इक्षा मृत्यु की मांग भी की | लोगों ने यह फ़रियाद उन लोगों से की जिस प्रशासनिक तंत्र की आँखों का नीर ही सूख चुका है ,| और जो तंत्र  एम्  पी , यूपी के बुंदेलखंड को   पिछले एक दशक में  जल के लिए  मिले 15 हजार करोड़  ठिकाने लगा चुका है  उससे उम्मीद करने की बेबसी किसानो की नजरों में साफ़  देखी  जा सकती थी | बुंदेलखंड में सूरज की तपन और सूखते जल श्रोतों ने हालात और भयावह बना दिए हैं | जल की जद्दोजहद में  बुंदेलखंड का हर दूसरा गाँव जूझ रहा है | ऐसे में लोगों को अब पुराने कुओं की तालाबों की भी याद आने लगी है | 

                               झांसी के कचहरी  चौराहे  पर स्थित  गाँधी पार्क में  24 मई से बुंदेलखंड किसान पंचायत के अध्यक्ष गौरी शंकर बिदुआ के नेतृत्व में पीने के पानी की मांग को लेकर अनिश्चित कालीन धरना शुरू किया | उनका दावा है की बुंदेलखंड में अनेकों गाँव पीने के पानी की समस्या से ग्रस्त हैं जानवर प्यास से दम तोड़ रहे हैं  | सरकार   दावे   कागजी साबित हो रहे हैं , जब तक समस्या का समाधान नहीं होता आंदोलन जारी रहेगा | 
                        देखा जाए तो यह समस्या सिर्फ झाँसी जिले की भर नहीं है , बल्कि बुंदेलखंड के गाँव गाँव की यही कहानी है | छतरपुर जिले का एक क़स्बा है बिजावर , यहां कभी लोग कुँए से पानी लेने के लिए बाल्टी में रस्सी नहीं बांधते थे बल्कि  हाथ  से बाल्टी कुए से भर लेते थे | यहां  लोगों ने परम्परागत कुओं को पाट दिया , उनकी जगह घरों में बोर करवा लिए , बटन दबाते ही पानी तो जमीन से इन लोगों ने खींचा पर , जमीन के जल का कर्ज अदा करना भूल गए , आज हालात ये हैं की पानी से संम्पन्न यह क़स्बा बून्द बून्द जल के लिए तरस रहा है | नगर पालिका नलों और टेंकरो से घर घर पानी पहुंचाने में जुटी है |  बिजावर के ही समीप है जटाशंकर धाम कहते हैं की यहां के कुंडों का पानी कभी खाली नहीं होता था , पम्प से पानी निकालने के बावजूद कुंड भरे रहते थे | अब  भगवान् शंकर के इस धाम के कुंडों में पानी सिर्फ इतना रहता है की बड़ी मुश्किल से शंकर जी के जलाभिषेक के लिए लोटा भर पाता है | अमावस्या के दिन स्थाई आने वाले लोग तो अब पानी साथ लेकर जाने लगे हैं |  छतरपुर जिले का ही एक और कुंड है भीम कुंड जिसके जल स्तर में इस बार ऐतिहासिक गिरावट देखने को मिली है | 
                           छतरपुर 100 किमी दूर बसे  जिले के बक्श्वाहा कस्बे  के हालात किसी से छिपे नहीं हैं |  इस कसबे में जल समस्या एक स्थाई समस्या बन गई है | इस छोटे से कसबे में पानी प्रदाय के हालत बेहद चिंताजनक हैं | यहां के पत्रकार विनोद जैन बताते हैं की  नगर पंचायत के अधिकार में 12 ट्यूब बेल हैं जिनमे से 8 सूख चुके हैं | नगर पंचायत 15 -15  दिनों में नलों से पानी सप्लाई करती है | जिस दिन यहां नल से जल सप्लाई होती है वह दिन किसी उत्सव से कम नहीं होता |  यहां की  ज्यादातर आबादी टेंकरो के पानी पर निर्भर है , इस कारोबार में लगभग ५० से ज्यादा टेंकर लगे हैं |  टेंकर वालों की भलमानसता ही कहें की वे 4000 लीटर पानी टेंकर के मात्र 200 रु लेते हैं |  

                             सामाजिक संस्था सोशल मीडिया फाउंडेशन की प्रारम्भिक  रिपोर्ट  कहती है कि   सागर संभाग  में  शासकीय तौर पर  95302 हेंड पम्प लगे हैं | जिनमे 571921  हेंड पम्प घटते जल स्तर , वा तकनिकी खराबी के कारण बंद पड़े हैं | सरकार ने आम आदमी को पानी उपलब्ध कराने के लिए सागर जिले में 10686 , छतरपुर जिले में 10124 , टीकमगढ़ जिले में 9606 ,दमोह जिले में 9376 और पन्ना जिले में 9510 हेण्डपम्प लगवाए गए हैं |  प्रशासन तंत्र वाह वाही लूटने के लिए सरकार को आंकड़े बताता है की सागर संभाग में मात्र 5 हजार हेंड पम्प बंद पड़े हैं | प्रतिशत में देखें तो यह मात्र पांच फीसदी हेण्डपम्प  सरकारी रिकार्ड में  बंद हैं |  
                                    
                                    बुंदेलखंड में तापमान 44 से 48 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच रहा है , लू के थपेड़े लोगों की जान ले रहे हैं , उस पर बचे खुचे पानी के वाष्पीकरण से समस्या और विकराल होती जा रही है | पिछले दिनों बुंदेलखंड के इन हालातों को समझने के लिए विदेशी मीडिया के दो पत्रकार आये थे | छतरपुर , सागर और दमोह जिले के  दौरे के बाद उन्होंने बताया की हमने तरह की पानी की  समस्या की उम्मीद की थी यहां तो उससे कहीं ज्यादा भयावह हालात हैं |  पानी की इस विकराल समस्या को देख समझ कर अब लोगों को अपने परम्परागत कुओं की याद आने लगी है |  उत्तर प्रदेश के महोबा जिले के बुंदेली समाज ने  तारा पाटकर  नेतृत्व में  प्राचीन कुओं  सफाई का अभियान शुरू हुआ | नगर पालिका के सहयोग से शुरू हुए इस अभियान में गोरखगिरि के निकट  बंद और कचरे से पटे  दूधिया कुँए की सफाई की गई तो कुँए का निर्मल जल देख लोगों की आँखे फटी की फटी रह गई |  पहले ही कुँए ने लोगों को उनकी गलती का अहसास करा दिया  की  पुरखों की जिस धरोहर को हमने बेकार समझा था वास्तव में वही काम की है | अब लोग उस कुँए को देखने पहुंच रहे हैं |  महोबा जिले के अभिलेख बताते हैं की जिले में 1240 कुए थे जिनमे से 800 कुँए अनुपयोगी बना दिए गए हैं |  इन 800 कुओं को पुनर्जीवित करने की जरुरत अब समाज को महशूस होने लगी है | 

                                बड़ा सवाल यही खड़ा होता है कि  बुंदेलखंड  की कितनी नगर पालिकाएं , नगर पंचायते ,ग्राम पंचायते  और महानगर पालिकाएं  महोबा नगर पालिका जैसा कार्य करने के लिए संकल्पित हैं ? देखा जाए तो बुंदेलखंड के हर नगर ,कसबे , गाँव में कुआं ,बावड़ी  जल के एक बड़े श्रोत थे | इनको आधुनिकता की चकाचौंध ने ना सिर्फ उपेक्षित किया बल्कि  इनका अस्तित्व ही ख़त्म कर दिया |  "प्यास लगने पर कुआं खोदने की युक्ति को ही चरितार्थ करते हुए  यदि इस दिशा में भी पहल की गई तो काफी कुछ समस्या का समाधान हो सकता है | दूसरा  कुँए ही हैं   जिनमे वर्षा जल का संरक्षण भी किया जा सकता है |     


20 मई, 2018

BKD- Dayri_सियासी जमीन तलाशने और बचाने में जुटे सियासतदान

बुंदेलखंड की डायरी 

सियासी जमीन तलाशने और बचाने में जुटे सियासत दान
 सियासी जमीन तलाशने और बचाने में जुटे सियासतदान 

रवीन्द्र व्यास 


 बीता हफ्ता  बुंदेलखंड राजनैतिक हलचलों का केंद्र रहा और खास कर खजुराहो | मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के दो घने  घने दौरों के बाद  सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्य मंत्री अखिलेश यादव ने खजुराहो में अपनी दस्तक दी | साल के अंत में होने वाले  विधान सभा  चुनावों को लेकर  राजनैतिक नेताओ में कोई  जमीन  तलाश रहा है तो कोई अपनी जमीन  को बचाने में जुटा है | वहीँ सियासत के इस अजब खेल में बुंदेलखंड के दो राष्ट्रीय नेता  चुनाव ना लड़ने की घोषणा कर  सियासत में  अपनी अलग राह बनाते नजर आ रहे हैं | 




  शनिवार को  खजुराहो के पांच सितारा  होटल में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पत्रकारो से रूबरू होने के बाद अपने कार्यकर्ताओं से भी मिले ।  सुविधा भोगी समाजवादी नेता जी का यह मिलन  समारोह पाच सितारा होटल में देर शाम तक चलता रहा ।  



पत्रकारो   से चर्चा की शुरुआत मे ही अखिलेश यादव को   कर्नाटक मे बगैर शक्ति परीक्षण के यदूरप्पा के इस्तीफे की खबर मिल गई थी । शुभ समाचार मिलने के बाद  अखिलेश  पत्रकार वार्ता के दौरान खासे उत्साहित नजर आए । यहां तक कि पत्रकारो के बेहूदा सवालो पर भी वे बौखलाए नही ।एक ही सवाल को बार बार पूछे जाने पर भी  उन्होने हर बार उसका जबाब दिया । 
 " कर्नाटक के मसले पर सुप्रीम कोर्ट का उन्होंने    शुक्रिया अदा किया | कम से कम लोकतंत्र को बचाने का काम सुप्रीम कोर्ट ने किया | वरना ये लोग तो सौ सौ करोड़ में विधायक खरीदने में जुटे थे |  साथ ही उन्होंने बीजेपी  को नसीहत भी दे डाली की बीजेपी ने जहां कही भी देश में इस तरह से सरकार बनाई है तो उसे ईमानदारी दिखाते हुए और लोकतंत्र की रक्षा के लिए , असली राष्ट्र भक्त साबित करने के लिए इस्तीफा  देना चाहिए | दुबारा उन्ही पार्टी को मौका मिलना चाहिए जिनके पास बहुमत है | हालांकि अखिलेश यादव  ने कहा की बीजेपी से यह उम्मीद करना  निरर्थक है | 
लोगों ने  तो उम्मीद की थी अच्छे दिन आएंगे पर आये नहीं | जनधन खाते में १५ -१५ लाख आये नहीं | जनधन खाते के एकाउंट सबसे ज्यादा कहीं बंद किये जारहे हैं तो उत्तर प्रदेश में बंद किये जा रहे हैं | यही हालात मध्य प्रदेश की भी है ना गरीब को पैसा मिला ना कुछ |  देश में   ऐसे  हालात पैदा  किये गए कि  किसानो ने  आत्म ह्त्या करना शुरू कर दिया  है | किसान तकलीफ में है परेशानी में है , ना उसे कीमत मिली है ना उसके घर खुशहाली आई है ना उसके नोजवान का कोई भविष्य बन पाया है और ना उसके सपने पूरे हुए हैं | | आंकड़े देखिये तो  किसान का सबसे बुरा हाल बीजेपी शासन काल में हुआ है । 
 उन्होंने बीजेपी पर देश की जनता को असली मुद्दों से भटकाने का भी  आरोप लगाया | अखिलेश का कहना था देश के अंदर अब बीजेपी के खिलाफ माहौल बनता चला जा रहा है | में समझता हूँ की कर्नाटक के अंदर जो ये सरकार नहीं बना पाए क्योंकि क़ीमते तय हो हो रही थी | सौ सो करोड़ में विधायक ख़रीदे जा रहे थे , ये भारतीय जनता पार्टी की नई संस्कृति है , नए ट्रेडिशन बनाये जा रहे हैं | 
 नोजवानो को सपने दिखाए , देश में राष्ट्र में बड़े पैमाने पर बेरोजगारी बड़ी है | केंद्र सरकार को जीएसटी   और नोट बंदी के मुद्दे पर घेरते हुए उन्होंने कहा की इससे देश में रोजगार के अवशर कम हुए बड़े पैमाने पर काम धंधे बंद हुए |



                           मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा की , मध्य प्रदेश में सड़को की हालत बद्द्तर है , देश में सबसे ज्यादा किसान महराष्ट्र में आत्म ह्त्या कर रहे हैं तो मध्य प्रदेश   भी पीछे नहीं है |  देश को खुशहाल बनाना है तो किसानो की खुशहाली पर ध्यान देना होगा | मध्य प्रदेश में एक भी मेट्रो नहीं , पर हमने यू पी में मेट्रो उपलब्ध कराई | ऐसी सड़क बनाई की उस पर लड़ाकू विमान भी उतर सकते हैं मध्य प्रदेश  में एक   भी ऐसी सड़क नहीं है |



                             अखिलेश ने साफ़ किया की अभी मध्य प्रदेश में कांग्रेस के साथ गठ बंधन कर चुनाव लड़ने का कोई फैसला नहीं लिया गया है | समाजवादी पार्टी अकेले ही मैदान में उतरेगी | हम चुनाव के पहले अपने संगठन को विस्तार और मजबूती देने का काम कर रहे हैं | हम इस प्रदेश में लम्बे समय तक काम करने और रिश्ता जोड़ने आये हैं । 
ये  अलग बात है कि मध्य प्रदेश की सियासी  अटकलो मे कांग्रेस सपा बसपा के गठबंधन की बात जोर शोर से कही जा रही है । दूसरी तरफ  वोट प्रतिशत को  देखा जाए तो बीएसपी का वोट प्रतिशत सपा की तुलना मे कई गुना ज्यादा है । इन हालातों में  समाजवादी पार्टी  को  अपनी सियासी  शक्ति का प्रदर्शन करना जरूरी लगा होगा। शायद   इसी मजबूरी के कारण सपा के  राष्ट्रीय अध्यक्ष  यह कहने को मजबूर हुए कि  अभी गठबन्धन पर कोई निर्णय नही लिया गया है । मध्यप्रदेश मे सपा के जनाधार का यदि आकलन किया जाए तो साफ है कि सपा  सिर्फ उप्र के सीमावर्ती क्षेत्र तक ही सीमित है । एक समय था जब बुन्देलखंड समाजवादियो का गढ था,  आज  इस  इलाके मे भगवा ध्वज फहरा रहा है ।

जिस राम मंदिर के मसले पर सपा हमेशा तुष्टीकरण की नीति  अपनाती रही  उसी राम मंदिर के मसले पर सपा के नौजवान सेनापति  अखिलेश यादव का नरम रुख लोगो को हैरान करने वाला लगा । अयोध्या के राम मंदिर का मामला सप्रीम कोर्ट मे है  कह कर वो इससे बच निकले । 
                     सपा  के अखिलेश   इस चुनावी साल मे मध्य प्रदेश में  सियासी आधार बनाने के लिए परेशान है । वही मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपनी सियासी आधार बचाये रखने के लिए परेशान है । बुन्देलखंड मे  खिसकते जनाधार को देखते हुए  उन्होंने चलो पंचायत की ओर कार्यक्रम की शुरुआत खजुराहो के समीप खरोॅही गांव से की। बीजेपी  सरकार की नीतियो और जनता के लिए किये गये कार्यो का उन्होंने बखान किया ।   18 मई को खजुराहो  के रेलवे स्टेशन के पास   छतरपुर  और पन्ना जिले के  असंगठित मजदूरो व तेदूपत्ता   श्रमिको   संयुक्त सम्मेलन सरकार ने  आयोजित कराया । इस मौके पर सीएम शिवराज सिंह ने  4 करोड़ 79 लाख रुपये की बोनस राशि  दोनो  जिलो के तेदूपत्ता  श्रमिको के खातों मे भेजी । दोनो जिला के 306  करोड़ रूपये के विकास कार्य का भूमिपूजन व लोकार्पण किया ।  सीएम ने मजदूरो को पंजियन   कार्ड ,आवास पट्टे का वितरण कर चरण पादुका योजना के तहत महिलाओ को चप्पल पहनाई,  पुरूषो को जूते  और पानी की बोतल दी । मुख्य मंत्री की इस सभा को सफल बनाने के लिए हर पंचायत  से पांच पांच वाहन में लोगों को भर कर लाने का लक्ष्य   रखा गया था |    सम्मलेन में तेंदुपत्ता  श्रमिकों को लाने का लक्ष्य वन समितियों को सौंपा गया था |  इन दिनों बुंदेलखंड में यदि कोई सबसे ज्यादा परेशान है तो वह हैं बस  और वाहन आपरेटर , जो आये दिन   मुख्यमंत्री की  बुंदेलखंड की सभाओ  भीड़ जुटाने के लिए  बाहन  उपलब्ध कराने को मजबूर हैं | मुख्य मंत्री ने तमाम  बाते की पर छतरपुर,  पन्ना ,टीकमगढ़ और दमोह में उठ रही मेडिकल कालेज की मांग पर  मुख्य मंत्री जी मौन ही रहे | छतरपुर के लोग जब उन्हें ज्ञापन देने पहुंचे तो आश्वासन दिया मसले पर गंभीरता पूर्वक विचार किया जाएगा |


 सियासत का सिंघासन पाने के लिए सियासी दल तपती  दोपहर में घमासान मचाये हैं पर बुंदेलखंड में जल बिन तड़प रहे लोगों , पलायन को मजबूर जनतंत्र को समझने की जरुरत किसी नामधारी  लोकतांत्रिक दल में नजर नहीं आ रही है | 





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