बुंदेलखंड की डायरी
जहा से पहली मांग उठी वही इलाका मौन
रवीन्द्र व्यास
बुंदेलखंड
का नाम लेते ही लोगों के जेहन में जो तस्वीर उभरती है वह बदहाली और बेबसी
की होती है| संपन्न धरा के लोग बेबसी से मुक्ति का रास्ता अलग राज्य में
तलाशते हैं | यह मांग ठीक उसी तरह की है जब परिवार में असमानता नजर आने
लगती है तो परिजन अपना अलग आसियान तलाशने लगते हैं | ऐसी ही असमानता को
लेकर उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके से अलग राज्य की मांग जोर शोर से उठ
रही है |झाँसी में इसको लेकर सत्याग्रह किया जा रहा है | मजे की बात ये है
कि जिस मध्य प्रदेश वाले इलाके से अलग बुंदेलखंड राज्य की मांग सबसे पहले
उठी थी वह शांत है |
असल में
पृथक बुंदेलखंड राज्य के मुद्दे पर बीजेपी नेता उमा भारती ने 2014 के
चुनाव में वायदा किया था की तीन माह में अलग राज्य बनवा दूंगी | तीन माह की
जगह तीन साल हो गए पर उमा जी का वायदा भी मोदी जी के चुनावी जुमले से
ज्यादा कुछ नहीं बन पाया | बुंदेलखंड के लोगों को उमा भारती के अलग राज्य
के वायदे पर भरोषा इस कारण भी हो गया क्योंकि बीजेपी के अटल जी और आडवाणी
जी के समय के घोषणा पत्रों में छोटे राज्यों की बात की गई थी |
बुन्देलखंडियों को लगा जो दल ही छोटे राज्यों की बात करता हो उसकी नेता भला
क्यों झूठ बोलेगी | पर वह दौर कुछ और था और ये दौर कुछ और है | इस दौर में
कुर्सी के लिए बीजेपी का चाल चरित्र और चेहरा सब बदल गया है | अब जो
इनकी बातों पर विश्वास करे वह गलती इनकी नहीं बल्कि जनमानस की मानी जायेगी
|
जबकि मध्य
प्रदेश वाले इलाके से सबसे पहले अलग बुंदेलखंड राज्य की मांग टीकमगढ़
रियासत के राजा वीरसिह ने उठाई थी । टीकमगढ़ से पं बनारसी दास चतुर्वेदी ने
बुंदेलखंड राज्य की इस मांग को अपनी पत्रिका मधुकर मे प्रमुखता से
प्रकाशित भी किया था । तब बुंदेलखंड राज्य की जो कल्पना की गई थी वह
बुंदेलखंड के राजा छत्रसाल की राज्य व्यवस्था के तहत थी । जिसमे
"इत चंबल उत नर्मदा , इत यमुना उत टौस
छत्रसाल से लड़न की रही ना काहु मे हौस"
आजादी
के बाद बुंदेलखंड राज्य भी बना और उसकी राजधानी भी वर्तमान मध्य प्रदेश के
नौगांव मे बनाई गई थी । पं राम सहाय तिवारी इसके पहले प्रधानमंत्री बने थे
। राज्य के पुनर्गठन के बाद बुंदेलखंड राज्य भी इतिहास मे दफन हो गया ।
विन्ध्य प्रदेश फिर मध्य प्रदेश मे बुंदेलखंड का एक बड़ा हिस्सा जोड़ दिया
गया । और आधा भाग उत्तर प्रदेश में जोड़ दिया गया था । बुंदेलखंड के विभाजन
और असमानता ने लोगो को अलग बुंदेलखंड राज्य की मांग के लिए मजबूर
किया । उस समय के अनेक काग्रेसी , सोशलिस्ट , भाकपा और जनसंघ के नेता
इसके समर्थन मे आगे आये । सागर के विट्ठल भाई पटेल , छतरपुर के महेंद्र
कुमार मानव , टीकमगढ़ के लक्ष्मी नारायण नायक आदि नेताओ ने लम्बे समय तक
आन्दोलन की अलख जगाये रखी थी । नौगांव व झाँसी के शंकर लाल मल्होत्रा तो
तन मन धन से इसके लिए समर्पित रहे ।
समय के साथ बुंदेलखंड का आकार प्रकार घटा दिया गया है । अब अलग
बुंदेलखंड राज्य की मांग करने वाले लोग मध्यप्रदेश के 6 जिले और
उत्तरप्रदेश के 7 जिलों को मिलाकर बुंदेलखंड राज्य बनाने की मांग कर रहे
हैं । लगभग 70 हजार वर्गकिलोमीटर मे फैले इस इलाके को अलग राज्य बनाने का
सपना दिखा कर लोगों ने अपनी सियासत तो चमकाई पर पृथक राज्य के संदर्भ मे
जो प्रयास होने चाहिए थे वह नही हुए ।
फिल्म एक्टर राजा बुंदेला ने भी काफी समय तक बुंदेलखंड राज्य
के लिए जतन किए । उन्होंने इसी आश्वासन पर काग्रेस का दामन भी थामा था ।
सासद का चुनाव भी लड़ा और जब वे हार गए तो काग्रेस ने उनकी अलग राज्य के
मुद्दे पर बात सुनना भी गवारा नही किया । अंत मे उन्हे बीजेपी मे कुछ
उम्मीद नजर आई तो वे बीजेपी मे सम्मलित हो गए । बीजेपी से शायद उन्हे
अलग राज्य का आश्वासन मिल गया है इस कारण अब वे अलग राज्य के आंदोलन मे
सक्रीय ना हो कर सिर्फ बयानबाजी तक सीमित है । हाल ही में राजा बुंदेला
ने लखनऊ मे पत्रकारो से चर्चा मे कहा है कि प्रथकबुंदेलखखंड के मुद्दे पर
बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और गृह मंत्री राजनाथ सिंह से चर्चा हुई है
।बीजेपी हमेशा छोटे राज्योंकी पक्षधर रही है , बुंदेलखंड राज्य बगैर किसी
उग्र आंदोलन के बनेगा ।क्योंकि हमारे यहा का नौजवान उग्र आंदोलन की
स्थिति में नहीं है । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ को भी इसमे कोई दिक्कतनहीं है उन्हे उम्मीद है कि विदर्भ और बुंदेलखंड जल्द ही अलग राज्य बन जायेगे ।
अब
अगर देखा जाए तो एक अजब हालात उभर कर सामने आते है । शोषण और विकास के
भ्रम जाल मे फसे मध्यप्रदेश के सागर , दमोह , टीकमगढ़ , छतरपुर ,पन्ना और
दतिया के लोगों के जेहन में यह बात सुनियोजित तरीके से बैठाई गई है कि अलग
राज्य बनने से उत्तर प्रदेश वाले ललितपुर ,झाँसी , महोबा , बांदा ,
हमीरपुर , जलौन
और
चित्रकूट के दबंगो की अपने शान्त इलाके मे घुसपैठ बड़ जायेगी । उनका
बरचस्व होगा और हमारी दशा और बदतर हो जायेगी । पर असल बात तो ये है कि
हर किसी की नजर मध्यप्रदेश वाले इलाके के खनिज भण्डार पर लगी है । 


