19 जुलाई, 2016

बुंदेलखंड की डायरी _ विनाशकारी बांध मिटटी में मिले मिटटी के बाँध


 मिटटी में मिले मिटटी के बाँध 

रवीन्द्र व्यास 

  
 " सब जानते हैं जो आया सो जाएगा राजा रंक फ़क़ीर " यह सब जानने  के बावजूद दुनिया में  आया ये सौ साल ( अधिकतम आयु ) का मुसाफिर  हजारो साल की गंदगी फैलाने पर आमादा है । बुंदेलखंड में एक कहावत है कि " पूत सपूत तो का धन संचय पूत कपूत तो का धन संचय " जिसका अर्थ बहुत व्यापक है । किन्तु इसके बाद भी लोगों की लालसा ऐसी है की वे अपने और पीढ़ियों के लिए  धन संचय में ऐसे जुटे हैं की उन्हें अपनी ही मानव जाति की जान की कोई कीमत ही नजर नहीं आती । ऐसा ही कुछ   बुंदेलखंड में हो रहा है । जहाँ बुंदेलखंड  पैकेज से बने मिटटी के बाँध मिटटी में मिल रहे हैं   तो कही पुल पुलिया टूट रहे हैं \ तो कहीं उफनती नदियों  से हालात बेकाबू हुए । 
                                                      पिछले दिनों  प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अरुण यादव  पन्ना जिला के दौरे पर आये, उन्होंने पन्ना जिले में बहे बांधों को लेकर बड़ी चिंता जताई । वे 58  करोड़ की लागत के सिरस्वाहा बाँध , 11 करोड़ की लागत से बने बिलखुरा बाँध का दौरा करने भी गए । इसके बाद उन्होंने कहा जिले में इन दोनों बांधो के अलावा 9 करोड़ की लागत से बना  नचनौरा बाँध भी पहली ही बर्षात में पत्ते की तरह बह गए । वे लोगों को यह बताने से भी नहीं चूके की बुंदेलखंड पैकेज से पैसा तत्कालीन यू पी ए सरकार ने दिए थे । उन्होंने इन बांधो के निर्माण में जमकर भ्रस्टाचार का आरोप लगाया । जिसमे उन्होंने अधिकारियों से लेकर मुख्य्मंत्री को समलित बताया ।  यह महज संयोग था या सियासत का दांव पेंच ठीक इसी दिन मध्य प्रदेश सरकार की मंत्री कुसुम मेहदेले ने नचनौरा बाँध का निरिक्षण किया । दूसरे दिन प्रदेश के मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान आये , वे किसी फूटे बाँध को देखने तो नहीं गए किन्तु उन्होंने पत्रकारों के सवालों के जबाब में यह जरूर कहा की  किसी भी दोषी व्यक्ति को बक्शा नहीं जाएगा । जिन दिनों नेता गण अपनी सियासत की चाले चल रहे थे उसी दौर में जिले का एक और बाँध वृन्दावन बाँध भी दरक  गया । 


 अधिकारियों ने सरकार को यह समझाने का जतन भी किया है की इस बार एक साथ इतनी बारिश हो गई जिस कारण बाँध ओवर फ्लो हो गए इस कारण बांधो से पानी निकालने का रास्ता बनाया गया । ये अलग बात है की फूटे बांधों से आस पास के गाँव में पानी भर गया और लोगों के जीवन का सहारा छिना । मिडासन नदी पर बने  नचनौरा बाँध  के पानी  के भय से  गाँव के लोग अपने विधायक महेंद्र बागरी को साथ लेकर कलेक्टर से फ़रियाद करने भी  पहुंचे । जनसुनवाई गुनौर जनपद पंचायत के  कचनारा के गाँव वालों  ने कलेक्टर को  बताया किकचनारा ग्राम के ऊपर पडेरी बांध बना दिया और ककरहाई बांध का पानी भी नीचे की तरफ हैअगर दो दिन तक लगातार बारिस हो गई तो आस पास के गांव डूब जायेगेंजिससे जान मालकी हानि हो सकती है। ग्रामीणों ने कलेक्टर से सुरक्षित आवास मुहैया कराये जाने की मांग कीताकि भविष्य में अनहोनी की घटना के पूर्व ही हम ग्रामीण सुरक्षित रहे सकें।  बाँध के पानी से बर्बाद हुए लोगों के जख्मो पर मलहम लगाने का प्रयास प्रशासन जरूर कर रहा है । लोगों को भरोषा दिया जा रहा है की उनका जो भी नुक्सान होगा उसका मुआवाजा मिलेगा ।   


                                पन्ना जिले में बांध फूटने का यह कोई पहला मामला नहीं है 2012 में 84 करोड़ की लागत से बना  मुटरु बाँध फूटा था । बुंदेलखंड पैकेज से  घटिया  बाँध अकेले  पन्ना जिले में ही नहीं बने इसके उदाहरण बुंदेलखंड के अन्य जिलों में भी देखने को मिले । सागर और गढ़ाकोटा के मध्य  चनौआ बुजुर्ग जलाशय बाँध में कई जगह से रिसाव शुरू हो गया । सवा नो करोड़ के लागत से बने इस जलाशय से करीब 700 एकड़ भूमि सिंचित होना थी । जलाशय का वेष्ट वीयर  से निकलने वाली नहर भी तेज बहाव में  बह  गई । महोबा उत्तर प्रदेश में महोबकंठ में बनाये गए १७-१७ लाख की लागत के दो स्टॉप दें पहली ही बारिश में दरक गए ।  
                                     दरअसल  राहुल गांधी ने बुंदेलखंड पैकेज दिलवाने के पहले बुंदेलखंड इलाके का  एन जी ओ के माध्यम से सर्वे करवाया था । सर्वे में यह बात उभर कर सामने आई थी की बुंदेलखंड में सबसे बड़ी समस्या पानी की है । पानी की उपलब्धता बड  जाए  तो लोगों की खेती बढ़ जायेगी जिससे लोगों में सम्पन्नता बढ़ेगी । इसी को ध्यान में रख जल सरक्षण और जल श्रोत विकसित करने के लिए विशेष ध्यान दिया गया । जिसके तहत स्टॉप डेम , जलाशय और बाँध निर्माण पर विशेष जोर दिया गया ।  पर वे शायद यह नहीं जानते थे  बुंदेलखंड इलाके में तैनात लुटेरे गिरोह  इतनी आसानी से आम आदमी को संम्पन्न नहीं होने देंगे ।  पहले वे खुद संम्पन्न होंगे , फिर आने वाली पीढ़ियों का जुगाड़ करेंगे उसके बाद जो बचेगा उससे निर्माण करेंगे । बुंदेलखंड में भी ऐसा ही हुआ । 
                                             पन्ना के फूटे बांधो की इंस्पेक्शन  रिपोर्ट में तो यही बात सामने आई है । रिपोर्ट  में माना गया है की सिरस्वाहा और बिलखुरा बाँध के निर्माण में तय मापदंडों का  पालन नहीं किया गया । बांध के निर्माण में मुरुम की जगह काली मिटटी का उपयोग किया गया है । हालंकि सरकार ने बाँध निर्माण में लापरवाही के आरोप के चलते ई  ई धीरेंद्र खरे , एस डी ओ जी पी उपाध्याय और उप यंत्री रमाकांत उपाध्याय को निलम्बित कर दिया । 
                                   
                                        देखा जाए तो ये  बाँध से सिर्फ पानी ही नहीं बहा बल्कि बाँध के भराव से आगामी फसल का सपना संजोय किसानो की आशाओं पर पानी भी फिरा है । पानी से उनके घर और सामान बर्बाद हुए वो  अलग ।  ये सब हुआ अधिकारियों की लालच के कारण जिन्होंने लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ी और उन्हें इसकी भी चिंता नहीं रही की इन बांधो के तट पर बसे लोग कैसे सुरक्षित रह पाएंगे ? 

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