29 मई, 2016

Bundelkhand dairy_बुंदेलखंड में जनता त्रस्त सरकार मस्त

 बुंदेलखंड में जनता त्रस्त सरकार मस्त 

रवीन्द्र व्यास 

बुंदेलखंड _ के दर्द की हरपल सुर्खिया बनती हैं देश दुनिया के समाचार माध्यमों में  सुप्रीम कोर्ट भी दर्द की दवा देने के निर्देश सरकार को देता है ,पर ना दवा मिली और ना दर्द कम हुआ ।ये हालात तब हैं जब सुप्रीम कोर्ट स्वयं जांच दल भेज कर बुंदेलखंड के हालातों पर नजर बनाये हुए है    उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके में केंद्रीय जांच दल   सूखे की स्थिति का जायजा लेने  कई गाँवों में  पहुंचा था   दल ने भी माना था की बुंदेलखंड के हालात वाकई बहुत खराब हैं ना पीने को पानी है और ना ही खाने को अनाज   मध्य प्रदेश वाले बुंदेलखंड इलाके के टीकमगढ़ जिले का जायजा लेने जब यह दल पहुंचा तो उसे यहां के हालात और भी बदत्तर मिले    मराठवाड़ा से होकर बुंदेलखंड आये स्वराज अभियान के संयोजक योगेन्द्र यादव अब यहां के वास्तविक हालात से  सुप्रीम कोर्ट को अगस्त में होने वाली पेशी में अवगत कराएंगे  तय है की सुप्रीम कोर्ट जांच दल वा योगेन्द्र यादव की रिपोर्ट सरकार को एक बार फिर उसकी सामाजिक जिम्मेदारियों के लिए कटघरे में खड़ा करेगी  पर फिलहाल सरकार तो अपने दो साल पूर्ण होने के जश्न में मस्त है , जनता रहे त्रस्त उसकी बला से 
                                        
                   बदहाल बुंदेलखंड के हाल देख कर सुर्प्रीम कोर्ट से नियुक्त रिटायर्ड आई..एस.हर्ष मंदर भी हैरान रह गए  वे टीकमगढ़ जिले के दो दिवसीय दौरे पर आये थे  उन्होंने अकाल ग्रस्त इस जिले में पाई संवेदन हीनता की पराकास्ठा  दल ने  टीकमगढ़ जिले के जतारा विकाश खण्ड के सिमरा एवं कुंवरपुरा , निवाड़ी विकाश खण्ड के लडवारी और चंद्रपुरा गाँवों में पहुँच कर हालातों का जायजा लिया  दल ने पाया की   स्कूलों में  रोजाना  बच्चों को  खाना तो दूर  नियमित तौर पर स्कूल भी नहीं खुल  रहे  है, मनरेगा में लोगों  काम  नही मिल  रहा  हैमनरेगा  अगर ठीक से चलता तो पलायन को रोका जा सकता था,  जिस प्रकार का काम लोगों को मिलना चहिये वह नही मिल रहा  बिजली बसूली के नाम पर  ,रिकबरी अभियान चलाकर लोगों की बिजली काट दी गई है जिससे लोग पंपों से पानी नही निकाल पा रहे है जो संबेदन हीनता की पराकाष्ठा ही कही जा सकती  है  राशन वितरण प्रणाली भी भगवान भरोशे  है कुंवर पूरा के आदिवासियों को चार माह से खाद्दान नहीं मिला   वहीँ इसी गाँव के आदिवासियों ने बताया की पट्टे तो उनके पास हैं पर कब्जा दबंगो का है  पानी लेने भी दूर दूर तक जाना पड़ता है  
                  पिछले दिनों   केंद्र सरकार का  दल सूखे की स्थिति का जायजा लेने उत्तर प्रदेश के  बुंदेलखडं के ललितपुर ,झाँसी ,महोबा , हमीरपुर ,बांदा ,चित्रकूट जिला  के कई गाँवों में  पहुंचा था   केन्द्रीय जाँच दल का मकसद  कम  बारिश के कारण खरीफ ,और रवि फसलों , आम लोगों के जीवन,  पशुपक्षी पर हुए असर का  अध्ययन करना था  इसके अलावा  पेयजल , जल संरक्षण सहित सरकार द्वारा चलाये गए राहत कार्यकम को किस तरह से जिला का प्रशासनिक अमला संचालित कर रहा है इसका मूल्यांकन करना रहा  दल ने ग्रामीणों से  पानी , मवेशियों को बांटे गए भूसा और मनरेगा योजना , पलायन की स्थिति पर  चर्चा की   दल के मुखिया  के सिंह ने माना कि  यहां के हालात बेहद गम्भीर हैं  जिसकी रिपोर्ट केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री को सौंपी जायेगी।
                                          
            महोबा जिले के कबरई विकास खण्ड के बरीपुरा गाँव में जाँच  दल को लेकर किसानो का अपना एक अलग नजरिया देखने को मिला  यहां का किसान माधव प्रसाद कहता है कि "  व्यवस्था कराए के लाने आये थे  हमने सुनाईकरी की चारा देहे पानी देहें तो कुछ व्यवस्था नहीं करी और खा पीकर भाग गए  ये लोग आते हैं बात सुनते हैं पै हम ओरन को कुछ लाभ नहीं होता   हम तो कैसे भी अपनी चला लेंगे पर बेजुवान पशु  के लिए ना पानी है और ना भूषा  हर रोज दो चार जानवर गाँव में मर रहे हैं  हर आने वाले के प्रति हसरत की निगाह से देखने वाले किसानो को  सूखा का जायजा लेने पहुंचे केंद्रीय दल से भी  आशा थी की केंद्र का दल आया है शायद कुछ भला हो जाएगा  यह कहानी सिर्फ वीरपुरा गाँव भर की नहीं है बल्कि बुंदेलखंड के जिस गाँव में भी यह दल पहुंचा उसे इसी तरह के हालात देखने को मिले  
       
                
        बुन्देलखण्ड में सूखे को लेकर एक अभियान की शुरूआतकरने वाले और देश के सामने बुंदेलखंड अकाल की विभीषिका सामने लाने वाले योगेन्द्र यादव  फिर से बुंदेलखंड के दौरे पर हैं  अबकी बार उनके साथ डॉराजेन्द्र सिंह , डॉ सुनीलम ,  और सुप्रीम कोर्ट के वकील अभीक साहा भी हैं   टीकमगढ जिले के आलमपुर गांव से शुरू हुई उनकी पदयात्रा  महोबा उत्तर प्रदेश में पूर्ण होगी  यादव  ग्रामीणों को बता रहे हैं  कि सर्वोच्च न्यायालय ने अपने ऐतिहासिक फैसले में प्रभावितों की मदद के लिए सरकारों को जो निर्देश दिए हैंउन्हें जन-जन तक पहुंचाने के लिए जल-हल यात्रा शुरू की गई है। इतना ही नहींवे वास्तविकता  का ब्यौरा एक अगस्त को होने वाली पेशी में हलफनामा देकर बताएँगे 
 15 -20 किमी रोजाना पदयात्रा करने के दौरान उनके साथ स्थानीय ग्रामवासियों की अच्छी खासी संख्या  यह बता रही थी की मानो उनके साथ चलने से उनकी विपत्ति का कुछ तो समाधान होगा ।   योगेन्द्र यादव यादव  लोगों को बातों ही बातों में यह बताने से नहीं चूकते की  इतना भयानक सूखा इतनी बड़ी त्रासदी है  बुंदेलखंड में है , ऐसे में  सारी मशीनरी  मंत्री और सांसद विधायक को सब को  सड़के नापनी चाहिए । मध्य प्रदेश सरकार ने हलफनामा देकर जो बातें कही उसकी धज्जियां उड़ती यहां देख रहे हैं । मिड डे मील नहीं मिल रहा , मनरेगा में काम नहीं मिल रहा , लोगों को राशन नहीं मिल रहा है, फसल नुक्सान का  मुआवजा मिल नहीं  रहा है , मिल क्या रहा है बैंकों के नोटिस । हालात बदलने  के लिए पूरे देश  को कदम उठाने होंगे , जब तक विकाश की नीति और धारा नहीं बदलेंगे तब तक बुंदेलखंड की अवस्था बुनियादी  नहीं बदलेगी । जनता को भी संघर्स करना तो सीखना होगा क्योंकि बगैर रोये माँ भी दूध नहीं पिलाती ।  
योगेन्द्र यादव की मध्य प्रदेश के प्रति सूखा ने  धारणा  भी बदल दी है । वे अब तक मानते रहे की एम पी बेहतर करती है किन्तु सूखा के इस दौर में मनरेगा में  यू पी ने 120 फीसदी काम किया किन्तु एम पी ने एक तिहाई भी नहीं किया । 

दिखावटी योजनाएं :-  बुंदेलखंड के मध्य प्रदेश के जिलों में अचानक सरकार ने सक्रियता दिखाने का प्रयास किया । प्रशासन को निर्देश जारी हुए की मनरेगा से गाँव -गाँव में तालाबों का गहरी करण कराया जाए , नए तालाब खोदे जाए । इस आदेश के बाद से गाँव गाँव के सरपंच और सचिव अपने अपने गाँव के तालाबों की योजना बनाकर  जनपद जिला पंचायत के चक्कर लगा रहे हैं । सरपंच और सचिव भी यह बात स्वीकारने में कोई परहेज नहीं करते की इतने विलम्ब से काम शुरू होगा , तब तक बारिश शुरू हो जायेगी , फिर काहे का गहरी करण होगा । 
                                                 बुंदेलखंड के लोग यदि सरकार की ऐसी योजनाओं से राहत की उम्मीद लगाए रहे तो कुछ होने जाने वाला नहीं है । प्रकृति के पर्यावरण चक्र के बदलते स्वरुप के कारण आने वाले समय में  और परेशानियों का समाना करना पडेगा । हालात का मुकाबला करने के लिए सब को मैदान  आना होगा , जल ,जंगल और जमीन का बेहतर प्रबंधन करना होगा । इसके विनाशक तत्वो को सबक सिखाना होगा ।     
    
रवीन्द्र व्यास

15 मई, 2016

BUndelkhnd Dayri_

जतन जल सरक्षण के 

रवीन्द्र व्यास 


सूखे से बदहाल और बून्द -बून्द पानी को तरशते बुंदेलखंड के लोग  संकट के समाधान के प्रयास में जुट गए  है । उन्हें अब ना सरकार का भरोषा रह गया है और ना ही प्रशासन का । पानी के नाम पर हुई लूट खशोट ने आम जन मानस को हिला कर रख दिया है । इन हालातों से निपटने के लिए लोग  खुद गेंती फावड़ा लेकर मैदान में आ गए  है । इस पर भी  तंत्र की बेशर्मी देखिये वह ऐसे लोगों की मदद करने से भी परहेज कर रहा  है । कम ही ऐसे प्रशासनिक अधिकारी हैं जो लोगों के इस अभियान में सहभागी बने हैं । 
                                                 
 नदी को जीवंत बनाने में जुटे नौजवान : 

संस्कृति और सभ्यताओं को विकसित करने वाले जल श्रोत जब दम तोड़ने लगें तो मान लो की अब समाज सुरक्षित नहीं हैं । वर्षो की उपेक्षा का परिणाम आज सबके सामने है । खतरे की घंटी तो बहुत पहले बज चुकी थी , वो तो हम अपनी आदतों से मजबूर हैं जो इस खतरे को समझ कर भी बेफिक्र रहे । आज जब हालात बेकाबू हो गए तब हमें अपनी गलतियों का एहसास हुआ । और चल पड़े हैं मंजिल की तलाश में  ऐसे ही हालात से जूझते बुन्देलखण्ड के लोग अब अपनी जल संरचनाओं को सहेजने में जुट गए हैं । नोगाँव में लोग नदी बचाने में जुटे हैं तो टीकमगढ़ जिले के चरी गाँव के लोग अपने बल पर नदी पर बाँध बनाने में जुटे हैं । लवकुश नगर में सूख चुके तालाब मान सागर का , वहीं  महराजपुर  तालाब का  , बिजावर तालाब  , टीकमगढ़  नगर के वृन्दावन तालाब , और पृथ्वीपुर के राधासगर तालाब  में जमा सिल्ट हटाने , तालाब की साफाई के अभियान में जुटे हैं । इस सारे अभियान में पन्ना के धर्म सागर तालाब के गहरीकरण और लोगों की सहभागिता ने बुंदेलखंड के अन्य लोगों को भी प्रेरित किया है । 
       ब्रिटिश शासन काल में पोलिटिकल एजेंसी के तौर पर नोगाँव  नगर को 1942 के बाद अंग्रेजो ने बसाया था ।      जनवरी 1842 में  बुंदेलखंड के बेला ताल रियासत के राजा को पकड़ने के लिए अंग्रेजों ने  यंहा डेरा डाला था। इसके आसपास बहती कुम्हेड और भडार नदी के कारण अंग्रेजो को यह इलाका  इतना भाया की बुंदेलखंड की रियासतों पर नियंत्रण के लिए यहां एक पूरा शहर ही बसा दिया ।  ब्रिटिश शासन काल में यहाँ  सैन्य छावनी भी बनाई गई थी । यह सब यहां कल कल बहती नदी के जल के भरोषे किया गया था  । 
             तालाब विहीन इस नगर के भू जल श्रोत के मुख्य श्रोत कुम्हेड  नदी नाला में बदल गई । नगर के लोगों को पानी देने वाली धसान नदी ने भी जबाब दे दिया । तब लोगो ने अपने श्रोतों से नगर को पानी की पूर्ति शुरू कर दी । फिर भी एक चिंता थी की भविष्य में क्या होगा , आज तो कुम्हेड  नदी के किनारों पर लगे ट्यूब वेळ से पानी निकाल ले रहे हैं , पर कल इससे पानी मिलेगा भी या नहीं ।

 इसके समाधान की दिशा में सामाजिक संस्था सोशल मीडिया फाउंडेशन के प्रमुख वा दैनिक प्रखर ज्ञान के सम्पादक राजेश अग्निहोत्री ने  युवाओं से चर्चा की ,और तय किया की नगर से सट कर बहने वाली नदी को फिर से जीवित किया जाएगा । आम सहमति से नोगाँव विकाश मंच का गठन हुआ और  इस अभियान का संयोजक भी राजेश अग्निहोत्री को  ही बना दिया ।  राजेश बताते हैं की  नाले में बदल चुकी यह कुम्हेड  नदी नगर का तीन  किमी का एरिया कवर करती है । आगे जा कर यह नदी भडार नदी में जा कर मिल जाती है । नदी को जीवंत बनाने के लिए नोगाँव के लोगों का जोश देखते ही बनता था । नदी के गहरी करण और उसके मूल स्वरुप 65 फिट चौड़ाई देने में पैसो की जरुरत थी । लोग खुद पहुँच कर दिल खोल कर दान देने लगे । दस दिन के इस अभियान में 42 से 46 डिग्री के तापमान में इन युवाओं ने लगभग दो किमी नदी का ना सिर्फ गहरी करण कर दिया बल्कि उसके मूल स्वरुप ६५ फिट चौड़ी कर दी लक्ष्य से सिर्फ एक  किमी दूर  है।  

                                                          कलेक्टर मसूद अख्तर ने स्वयं कुम्हेड नदी पर पहुँच कर  इस अभियान को सराहा । उंन्होंने यह भी भरोषा दिलाया था की जितना पैसा आप लोग जोड़ेंगे उतना ही पैसा जन भागीदारी से दिया जाएगा । स्थानीय लोगों और बीजेपी के बिजावर विधायक पुष्पेंद्र नाथ पाठक के एक लाख रु के  सहयोग से अब तक सभी लोगों के प्रयास से  चार लाख रु की राशि इस कार्य के लिए जोड़ी गई । नगर पालिका के कर्मचारियों ने अपना एक दिन का वेतन इस कार्य हेतु दिया । हालांकि स्थानीय विधायक और सांसद का अब तक इस कार्य में कोई सहयोग ना मिलने पर  लोगो का नाराज होना स्वाभाविक है  ।  
                      आजादी के बाद बुंदेलखंड की राजधानी का गौरव प्राप्त नोगाँव नगर की  जीवन रेखा कही जाने वाली इन दो छोटी छोटी नदियों के साथ सरकारी तंत्र और समाज ने जम कर खिलवाड़ किया ।  बुंदेलखंड पैकेज से इस नदी पर 8 स्टॉप डेम बने होने की बात कही जा रही है । पर नदी बचाओ अभियान से जुड़े इंजिनियर सी बी त्रिपाठी जिन्होंने वर्षो तक ग्रामीण यांत्रिकी सेवा में अपनी सेवाएं दी बताते हैं की इस नदी पर पहले 6 _7  स्टॉप डेम बने थे , जो बुंदेलखंड पैकेज के नहीं हैं । 
    
बाँध बनाने में जुटे बच्चे से बूढ़े तक                                         

   टीकमगढ़ जिले के चरी गाँव के लोगों ने जब देखा की जल संकट के नाम पर करोडो रु कागजो में खर्च हो गए और उनके सामने पानी का संकट जस का तस है । यहां तक की 2008 से  बुंदेलखंड पॅकेज से गाँव की जल समस्या के समाधान की आस भी उनके लिए बेमानी साबित हुई । पॅकेज से मध्य प्रदेश के छतरपुर ,पन्ना , टीकमगढ़ , सागर ,दमोह और दतिया के लिए 3600 करोड़ की राशि मिली थी । इस राशि में से एक बड़ा हिस्सा जल सरचनाो , पर खर्च होना था । कागजो में खर्च हुए जमीनी लाभ ना के बराबर  रहा । बनाये गए स्टॉप डेम के ठेके (पेटी कांट्रेक्ट पर ) जनसेवकों ने हथिया लिए थे । नतीजा घटिया निर्माण और गेट विहीन ये स्टॉप डेम पानी रोकने में मदद गार नहीं रहे । यही हाल नल जल योजनाओं का रहा ।  
                                    
     सरकार और जन सेवकों और प्रशासन के इस तमाशे को देखने के और बून्द -बून्द पानी के लिए  तरशने के  बाद  पलेरा विकाश खण्ड के चरी गाँव के लोग खुद गेंती फावड़ा लेकर बाँध बनाने जुट गए ।  गाँव के पास से निकली सांदनी नदी जो पूर्णतः सूखी पड़ी है ।  इस पर 150 फिट लम्बा ,15 फिट चौड़ा और 5 फिट ऊंचा बाँध बनाने में जुट गए । गाँव के जमुना प्रसाद बताते हैं की  इस अभियान में चरी के अलावा आसपास के चार पांच गाँव के लोग भी सहयोग कर रहे हैं । दरअसल इन गाँव वालों की फसलें खराब हो गई , हाथ में पैसा है नहीं की मशीन से बाँध बनवा ले , प्रशासन सुनता नहीं ,नेता जी पांच साल में एक बार दर्शन देते हैं , पर ये लोग हालात से हारे नहीं और खुद जुट गए । गाँव के बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक रोजाना चना खाकर बाँध बनाने में जुटे हैं । उन्हें भरोषा है की बरसात  के पहले तक उनका बाँध बन जाएगा और  बहने वाले पानी को वे सहेज लेंगे । ४४-४५ डिग्री के तापमान पर जब शहरी लोगों को घर से बाहर निकलने का हौसला  नहीं होता तब ये बाँध बना कर अपना और समाज का भविष्य बचाने में जुटे रहते । यहाँ के प्रशासन से इन्हे कोई सहयोग तो नहीं मिला , पर मीडिया के पूंछने पर जिला पंचायत सी ई ओ इन लोगों के काम की सराहना करते नहीं थकते । 

जतन जल संरक्षण के 

चंदेल कालीन लवकुशनगर,के  मानसागर तालाब की खुदाई का कार्य जन सहयोग से किया  है ।  राजा मानसिंह के द्वारा खुदाये गए इस  तालाब की  कभी खुदाई नहीं हुई ।  जब  तालाब पूरी तरह से सूख गया तो  एस.डी.एम  धुर्वे ने बिना किसी बजट के जन सहयोग से उक्त तालाब की खुदाई का बीड़ा उठाया। तालाब के गहरी करण और सफाई में  नगर के लोगों वा पत्रकारों बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया । ये अलग बात है जनसेवक  अभियान से अपनी दूरी बनाये रखे हुए हैं । 


   छतरपुर जिला के बिजावर कसबे का चंदेलकालीन तालाब को भी नागरिकों की पहल पर साफ़ सुथरा और गहरीकरण किया जा रहा है । बिजावर के इसी तालाब के कारण यहां इतना जल स्तर रहता था की लोग बगैर रस्सी के कुए से पानी ले लेते थे । आज से ही महराजपुर  तालाब का गहरी करण और सफाई अभियान शुरू हुआ । विधायक मानवेन्द्र सिंह ने पहुँच कर अभियान  शुरुआत कराई । 
टीकमगढ़ की नवागत कलेक्टर प्रियंका दास ने सूखे को देख कर नगर के वृन्दावन तालाब के गहरी करण का कार्य जलाभिषेक अभियान  शुरू कराया । नगर पालिका परिषद इस कार्य को जन सहयोग से चला रही है । टीकमगढ़ जिले के पृथ्वीपुर नगर के राधासगर तालाब का भी जीर्णोद्धार  सहयोग से किया जा रहा है ॥ 
 पन्ना नगर के धर्मसागर तालाब के गहरीकरण के लिए लोगों ने ३० लाख से ज्यादा की राशि जन सहयोग से जोड़ी है । तालाब के कायाकल्प के लिए ये अभियान एक आंदोलन का रूप ले चुका है ।  इसी जिले के अजयगढ़ कसबे के   खोय  तालाब का  गहरीकरण कार्य में समाज जुट गया है । ये अलग बात है की कसबे के बस स्टेण्ड के नष्ट होते तालाब की तरफ किसी का ध्यान नहीं है । 
                               बुंदेलखंड के एकलौते ऐसे सांसद प्रहलाद पटेल हैं जिन्होंने हटा (दमोह) के लुहारी तालाब को गोद लिया और तालाब के गहरीकरण में जुटे । बाकी सांसदों को शायद जल की इस विभीषिका से कोई सरोकार नहीं है । 

                    दरअसल बुंदेलखंड का इलाका अपने परम्परागत जल श्रोत तालाब , कुआ और बावड़ी पर निर्भर रहा है । प्रकृति के अनुकूल होने के कारण इससे उनकी आवश्यक जरूरतें पूर्ण होती रही । बढ़ती आबादी के बोझ और अधिक लाभ की लालशा ने लोगों ने पानी का दोहन शुरू कर दिया , परिणामतः भू-जल भी दूर हुआ और कम  वर्षा  होने से  सरोवर भरे नहीं उस पर बढ़ते तापमान ने सरोवरों को सुखा दिया । विपत्ति में ही सही लोगों को अपने जल श्रोतो को सहेजने की चिंता तो हुई ।  

08 मई, 2016

Bundelkhand Dayri


सड़क से संसद तक बुंदेलखंड का पानी 



रवीन्द्र व्यास 

बुंदेलखंड में पानी की रेल  केंद्र ने क्या भेजी ,बुंदेलखंड की सड़कों से लेकर संसद तक समाजवादी नेताओं ने कोहराम मचा डाला । पानी की कमी को लेकर चिंता जताने वाला तंत्र रेल के आते ही कहने लगा हमारे पास पानी की कमी नहीं है । फिर हम ये पानी रखेंगे कहाँ , हमें टेंकर दो । राज्य सभा में तो सपा नेताओं ने रेल मंत्री पर पानी को लेकर राजनीति करने का आरोप ही लगा डाला और उनसे इस्तीफे की मांग कर डाली ।  उत्तर प्रदेश की  सपा सरकार  को भय है की कहीं लोगो ने मोदी सरकार द्वारा भेजे गए पानी को पी लिया  तो उनके द्वारा राहत पैकेट में दिया जा रहा नमक घुल जाएगा और 2017 के चुनाव में बुंदेलखंड उनसे दूर हो जाएगा । 
                                       मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में विभक्त  लगभग दो करोड़ की आबादी वाले बुंदेलखंड इलाके के  13 जिलों में ६ मध्य प्रदेश के और 7 जिले उत्तर प्रदेश में हैं । 2017 में उत्तर प्रदेश में चुनाव हैं इसलिए सूखे का मुख्य केंद्र उत्तर प्रदेश का बुंदेलखंड इलाका है । यहां की चारो  लोकसभा सीटे बीजेपी के पास हैं , विधान सभा की 19 सीटों में बीएसपी और एस पी के पास सात सात सीटें हैं । सपा के लिए यही चिंता की सबसे बड़ी वजह है । उत्तर प्रदेश में चुनाव की आहट के चलते बुंदेलखंड के लिए अखिलेश सरकार ने खजाना खोल रखा है , राहत के पैकेट बांटे जा रहे हैं । अब ऐसे दौर में मोदी सरकार ने पानी की ट्रेन भेज कर बुंदेलखंड के लोगों की जल समस्या दूर करने का छोटा सा प्रयास किया । जिसे  अखिलेश सरकार ने उनके  राहत पैकेट को बहाने का  प्रयास मान लिया और ट्रेन का पानी लेने से इंकार कर दिया । पहला प्रयास और प्रचार यह किया गया की खाली ट्रैन आई है ,। अब इनसे कौन पूछे की जब ट्रैन में पानी झाँसी में भरा जाना है तो ट्रैन तो खाली आएगी ही । फिर  कहा गया की हमारे पास पर्याप्त पानी है ,और फिर यह पानी हम रखेंगे कहाँ , इसके लिए 10 हजार टेंकरों की जरुरत है ।  
                                       ट्रेन के  पानी को लेकर सियासत का यह संग्राम बुंदेलखंड की सड़कों से लेकर संसद तक चला । हमीरपुर -महोबा से  बीजेपी सांसद पुष्पेंद्र सिंह चंदेल के समर्थकों ने महोबा वासियो को यह बताया था की पानी ट्रेन उन्ही की पहल पर आ रही है । जब प्रशासन ने इस पर रोक लगाईं तो बीजेपी के लोग सड़कों पर उतर आये और प्रदर्शन कर राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा । वहीँ 5 मई को महोबा आये उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट  शिवपाल यादव ने  कह दिया की बुंदेलखंड में पानी की कमी नहीं है । जब जरुरत होगी तब केंद्र से मदद मांगी जायेगी । महोबा जिला प्रशासन ने तर्क दिया कि रेलवे स्टेशन से पानी लाने में दूरी ज्यादा है ट्रांस्पोर्टेशन का खर्च ज्यादा आयेगा । यह बहाना ठीक उसी तरह का है की जब सरकार और प्रशासन को काम नहीं करना होता है तो उसमे अनेको तरह की कमियाँ तलाश ली जाती हैं , और जो कुछ करना होता है उसमे अनेको कमियों के बाद रास्ता निकाल लिया जाता है । 


इस मसले को लेकर संसद में हंगामा भी कुछ कम नहीं हुआ , सपा सांसदों ने खाली पानी की ट्रेन भेजने का आरोप लगाते हुए रेल मंत्री सुरेश प्रभु से इस्तीफे की मांग कर डाली । पानी की ट्रेन के माध्यम से राजनीति करने के आरोप लगाए गए । हालांकि मंत्री जी कहते रहे की संकट की इस घडी में सब को मिलकर काम करने की जरुरत है ,। लोगों की प्यास को लेकर ना हम राजनीति करते हैं और ना करेंगे । पर इस जबाब से सपा नेता संतुष्ट नहीं हुए और सदन से वाक् आउट कर गए । हद तो तब हो गई जब यू पी सरकार ने अपने ट्विटर पर बुंदेलखंड के जलाशयों की पानी से लबालब तस्वीरें डाली । महोबा में जब इन जलाशयों की वास्तविकता देखी गई तो हालत चौकाने वाले निकले । जिन जलाशयों को पानी से भरा दिखाया गया उनमे नाम मात्र का पानी मिला । चाहे वो कीरत सागर हो कोठी ताल ।  उर्मिल बाँध डेड लेबल से नीचे पहुँच गया है  इस बाँध से महोबा,श्री नगर ,सिजहरी और बसौरा में जल प्रदाय किया जाता है ,। अर्जुन बाँध   90 फीसदी सूख गया  है । यू पी सरकार का यह प्रचार अभियान अब उसी के गले की फांस बन गया है । समस्या को देख आँख बंद कर लेने से समस्या का समाधान नहीं होता ।

      मुख्य मंत्री अखिलेश यादव ने 7 मई को प्रधान मंत्री मोदी  से मुलाकत कर  सूखे के मसले पर राज्य सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयासों को बतया था । जिसमे उन्होंने दवा किया था कि 78 हजार जल निकायों को दुरुस्त किया गया है , जिसमे टेंक ,तालाब , खेत तालाब सम्मलित हैं । एक लाख जल निकाय और जल केंद्र बनाने की बात कही गई । केंद्र ने उत्तर प्रदेश को आपदा कोष से ९३४ करोड़ की सहायता राशि प्रदान की है । प्रधान मंत्री से मुलाक़ात के बाद संतुष्ट बताये जा रहे अखिलेश यादव ने मीडिया से चर्चा के दौरान मीडिया पर बुंदेलखंड की गलत तस्वीर पेश करने का आरोप मड़ दिया । पत्रकार अगर आईना दिखाये तो नेताओ को नागवार गुजरेगा ही । अब देखिये महोबा जिले के किसान हीरा लाल यादव को पानी चोरी के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया । उस पर आरोप है की उसने उर्मिल डेम से निकली पाइप लाइन के वाल्व को क्षति ग्रस्त कर पानी चुराया और अपने खेत की सिचाई की । जबकि यह पाइप लाइन पहले से ही क्षति ग्रस्त थी और उससे पानी बहता था । हीरालाल का कसूर सिर्फ इतना था की उसने बहते पानी के पास गड्ढ़ा बनाया और पानी खेत तक ले गया । पर संवेदन शील सरकार है कुछ भी कर सकती है । 
                                             
                                    असल में सियासत का रंग ही कुछ ऐसा होता है , जिसमे काम कम और प्रचार ज्यादा होता है । कोई भी योजना लागू करने के पहले राजनैतिक लाभ हानि का गणित तय किया जाता है । यही कारण है की उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके में राहत की गंगा बहाई जा रही है या ये कहे की इसका दिखावा किया जा रहा है , वहीँ मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके के सूखा का पैसा दूसरे जिलों में खर्च किया जा रहा है ।  जब की दर्द दोनों जगह  एक जैसा है । 

01 मई, 2016

Bundelkhand Dayri_

बुंदेलखंड की डायरी 

सरोवर  से सरोकार 

रवींद्र व्यास 

बुंदेलखंड के पन्ना जिले के कलेक्टर के पास छोटे छोटे बच्चे अपनी गुल्लक की जमा पूंजी , तो कोई बच्चा अपने जन्म दिन पर मिली उपहार की राशि लेकर पहुंचे । इन बच्चों ने जब उन्हें यह बताया की वे यह राशि नगर के धर्म सागर तालाब की खुदाई  के लिए देने आये हैं तो बरबस ही कलेक्टर की आँखें भी नम हो गई ।  पिछले एक माह से पन्ना नगर के प्रमुख धर्म सागर तालाब की खुदाई का काम चल रहा है । तालाब की इस खुदाई में यहां की जनता और प्रशासन कंधे से कन्धा मिलाकर अभियान में जुटे हैं । क्या मालिक ,क्या मजदूर ,क्या धर्म क्या जाति , हर कोई तन मन और धन से जल की जंग में जुटा है ।पन्ना के ही बुजुर्ग बताते  हैं कि  पन्ना में ऐसा अभियान वर्षो पहले तब देखने को मिला था जब पन्ना को जिला बनवाना था । इस सब के बीच कुछ ऐसे भी राज तत्व हैं जिन्हे यह अभियान रास नहीं आ रहा है । 


     जनवरी और फरवरी माह में यहां के लोगों ने धर्म सागर तालाब और इससे जुड़े 56 कुओं की दशा देख कर जल संकट का अनुमान लगा लिया था ।पन्ना का  कभी ना सूखने वाला र्म सागर तालाब  जब सूखने लगा ब   प्रशासन को भी  आने वाले खतरे का 
अहसास हुआ   पन्ना कलेक्टर शिव नारायण सिंह चौहान स्वयं तालाब देखने पहुंचे  उन्होंने तालाब  और  उससे जुडी जल सुरंगों को मझा ।  तब तय हुआ की तालाब  का जल श्रोत बेहतर हो जाये , और तालाब में पर्याप्त जल भराव हो जाए इसके लिए प्रयास किये जाए । ताकि पन्ना नगर को फिर कभी जल अभाव का सामना ना करना पड़े । इसके लिए जरुरत थी धन और श्रम के साथ लोगों के मन की


। पन्ना के केंद्रीय विद्यालय में तीसरी क्लास की छात्रा मिनिषा दुबे ने जन्म दिन पर उपहार में मिले 1111 रु तालाब के लिए कलेक्टर को दे दिए , इसी तरह दर्जन भर बच्चों ने अपनी गुल्लक में जमा राशि इस पुनीत कार्य के लिए दे दी । नगर के किन्नर गुरु हमीदा ने 1o हजार रु देकर,नगर के कटरा मोहल्ला की चंद्रा रानी ने अपनी वृद्धावस्था पेंशन 500 रु कलेक्टर को सौंप कर समाज को अपने सामाजिक सरोकारों का अहसास कराया । इस तरह अब तक 32 लाख रु से ज्यादा की राशि जन सहयोग से जुड़ गई है । 


 तालाब के लिए जन अभियान :

पन्ना के सामाजिक सरोकारों से जुड़े लोगों को जब पता लगा की सरकार ने धर्म सागर और लोक पाल सागर के काया कल्प के लिए तीन करोड़ 31 लाख की स्वीकृति दी है । इसके लिए बाकायदा टेन्डर भी लगे और ठेकेदारों ने टेंडर भी डाले । टेंडर स्वीकृति के बाद , उसकी सूचना भी ठेकेदार को दी गई , पर स्वीकृति के अंतिम चरण में थी तभी एन  मौके पर टेंडर निरस्त करवा  दिया गया । यह किसी और ने नहीं बल्कि पन्ना के ही सत्ताधारी  राजनैतिक रसूख वाले व्यक्तित्व के प्रयासों से हुआ । दरअसल उन्हें इस बात की जानकारी लग गई थी की यह टेंडर जिस कम्पनी को मिला है उसे उनके कथित  राजनैतिक विरोधी का संरक्षण  है । सियासत की इस जंग में पन्ना को इस तरह  एक बड़ा नुक्शान अपनों के ही कारण  हुआ । 


इसकी भनक जब पन्ना की  जुझारू जनता को लगी तो लोगों ने नगर के जीवन दाई धर्म सागर तालाब को नया जीवन देने का प्रण लिया और यहां के कलेक्टर ने उसमे सहयोग दिया । जिसकी जनता और मीडिया में जम कर प्रशंसा हो रही है । अब उन्हें  यह बात भी उन्हें नागवार गुजर रही है की इसका श्रेय उन्हें नहीं बल्कि कलेक्टर को मिल रहा है । अब कौन उन्हें समझाए की विकाश में अवरोध पैदा करने वालो को जनता और उनकी विरादरी के लोग लम्बे समय तक बर्दास्त नहीं करते । 
धर्म सागर तालाब 
  17  वी सदी में सभा सिंह  तत्कालीन राजा ने पन्ना नगर के मदार टुंगा पहाड़ी की तलहटी में विशाल  तालाब का निर्माण 1745 में धर्म कुंड से  शुरू कराया । कुंड के प्रति लोगों की आस्था को देखते हुए यहां शिव मंदिर का भी निर्माण किया गया ।  1752 में जब यह तालाब पूर्ण हुआ तो लोगों ने इसे धर्म सागर नाम  दे दिया । 75 एकड़ में फैले इस तालाब  निर्माण के दौरान  56   जल सुरंगे बनाई गई थी ,और  सुरंगों को नगर के कुओं पार्क और महल के तालाब से जोड़ा गया था  ।  धर्म सागर तालाब से नगर के कुओं तक जल सुरंगों का जोड़ना अपने आप 
में एक अनोखा प्रयोग था । 9 किमी  जल अधिग्रहण क्षेत्र  क्षेत्र वाले इस  तालाब का निर्माण इस तरह से किया गया है की इसमें किसी भी तरह से शहर की गन्दी नालियों को नहीं जोड़ा जा सकता है । इस तालाब का जब निर्माण हुआ था उस समय पत्थरों पर बसे इस नगर के लोगों को भयानक जल संकट का सामना करना पड़ रहा था , अब जब इसका जीर्णोद्धार भी ऐसे समय हो रहा है जब नगर के लोग जल संकट का सामना कर रहे हैं । 
         
  तालाब के जीर्णोद्धार के बाद यहां वर्षो तक के लिए लोगों को सूखा से संघर्ष का बल मिलेगा ।  इस बात की भी जरुरत समझी जाने  लगी  हैं की नगर के अन्य तालाबों का भी जीर्णोद्धार हो और अतिक्रमण कारियों से नगर के तालाबों को मुक्त कराया जाए । 

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