रवीन्द्र व्यास
बुंदेलखंड _ में चुनावो का शंख नाद हो चुका है / मध्य प्रदेश के मुख्य मंत्री नरेंद्र मोदी के नक़्शे कदम पर चलकर अपना खुद का वजूद पार्टी को बताने में जुटे हें / अपने इस अभियान के तहत उन्होंने मध्य प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनवाने वाली उमा भारती को दरकिनार कर दिया है \ मध्य प्रदेश के पहले चुनाव में 4 . 71 फीसदी वोट लेकर उमा भारती ने कांग्रेस को 2008 में सत्ता में आने से रोक दिया था , अन्यथा 5. 24 फीसदी मतों के अंतर से हारने वाली कांग्रेस कहीं और होती / बुंदेलखंड में तो यह आंकड़ा और भी खतरनाक है \ यहाँ उमा भारती को 12. 34 फीसदी मत मिले थे , और उसके दो प्रत्याशी चुनाव जीते थे चार स्थानो पर वे जीत कि कगार पर थे \ जब कि इस इलाके में कांग्रेस और बीजेपी के मतों मात्र 3. 63 फीसदी मतों का ही अंतर था । तीसरी बार सरकार बनाने का सपना संजोय शिवराज सिंह को बुंदेलखंड में उमा कि उपेक्षा भारी पड़ सकती है ।
देखा जाए तो मध्य प्रदेश में सत्ता के बाहर बैठी कांग्रेस के पास खोने के लिए कुछ नहीं है और पाने के लिए प्रदेश कि सत्ता है \ इसको देख कांग्रेस के कार्यकर्ता और नेता अपना सब कुछ भुला कर एक मत से चुनावी रणनीति बनाने में जुटे हें , जबकि बीजेपी के वे तमाम कार्यकर्ता टिकिट वितरण कि वर्त्तमान निति रीति से दुखी हें । हाल ही में बीजेपी ने 147 नामो की जो घोषणा की है उसको लेकर बीजेपी का अशंतोष खुलकर सड़क पर आ गया / ऐसे में उमा भारती की उपेक्षा करना बुंदेलखंड इलाके में पार्टी को कितना भारी पडेगा इसका सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है । बुंदेलखंड का यह इलाका पिछड़ा वर्ग के समीकरण के लिए जाना जाता है । और उमा भारती को इस इलाके में वैसे सामन्ती शक्तियो को छोड़ दिया जाये तो हर कोई मानता है । सामन्ती शक्तिया उन्हे अपने दुश्मन के रूप में देखती हें । प्रदेश में संगठन कि बागडोर नरेंद्र सिंह तोमर के हाथ आते ही ये शक्तिया खुल कर सामने आ गई हें \ इसी का परिणाम बीजेपी के टिकिट वितरण में देखने को मिला है ।
पन्ना के पवई विधान सभा सीट पर मंत्री ब्रजेन्द्र प्रताप सिंह का विरोध होने के बावजूद उन्हे टिकिट दिया गया /वे पिछला चुनाव जनशक्ति के प्रत्याशी से मात्र 0.81 फीसदी मतों के अंतर से जीत पाये थे / छतरपुर जिले के महराजपुर विधान सभा सीट से बीजेपी ने हाल ही में पार्टी में शामिल हुए मानवेन्द्र सिंह को टिकिट देकर कार्यकर्ताओ को अंगूठा दिखा दिया / दिग्विजय मंत्रिमंडल में राज्य मंत्री रहे मानवेन्द्र सिंह कांग्रेस से टिकिट ना मिलने के कारण पिछला चुनाव निर्दलीय लड़े थे / और चतुष्कोणीय संघर्ष में वे बीजेपी के पुष्पेन्द्र पाठक से मात्र 1.35 फीसदी मतों के अंतर से चुनाव जीत पाए थे । बीजेपी कार्यकर्ताओ का इस सीट पर असंतोष इस कारण और भी ज्यादा है क्यों कि यह सीट 1962 से अब तक सुरक्षित सीट रही । 2003 तक हुए दस चुनावो में 7 बार बीजेपी 3 बार कांग्रेस चुनाव जीती । इस कारण भी यहाँ के कार्यकर्ताओ की अपेक्षाए कुछ ज्यादा थी । पर शायद वे ये नहीं जानते की नैतिकता का पाठ सिर्फ कार्यकर्ताओ के लिए होता है , पार्टी के सत्ता धीशों के लिए सत्ता ज्यादा जरुरी होती है /
राजनगर विधान सभा सीट से बीजेपी ने कांग्रेस के विधयक विक्रम सिंह (नाती राजा) के विरुद्ध अपने मंत्री राम कृष्ण कुशमारिया को चुनाव मैदान में उतारा है / डॉ। कुशमरिया ने पिछला चुनाव दमोह जिले कि पथरिया विधान सभा सीट से लड़ा था , और बा मुशकिल वे आधा फीसदी मतों के अंतर से बीएसपी प्रत्याशी पुष्पेन्द्र सिंह हजारी को हरा पाये थे / उनके इस विधान सीट पर उनका जमकर विरोध था । पर वे सरकार में मंत्री हें और पार्टी में उन्हे पटेलों (कुर्मी) का बड़ा नेता माना जाता है इस कारण उन्हे छतरपुर जिले कि पटेल बाहुल्य सीट से मैदान में उतारकर बीजेपी मैदान मारना चाहती है / यहाँ पर उनका विरोध जैम कर हो रहा है , पर ऊन्हे इस सीट पर कांग्रेस के अन्तरकलह का लाभ मिल सकता है /
बुंदेलखंड में बीजेपी के इन हालातो को देख कर कांग्रेसी उत्साहित हें , वहीं उमा भारती से जुड़े नेताओं का मानना है की ये सारी स्थितियां बीजेपी की तिकड़ी द्वारा जानबूझ कर बनाई जा रही है , ताकि बुंदेलखंड में हार का ठीकरा उमा के सर पर फोड़ा जाए /