28 नवंबर, 2012


जिनने साठ  साल कुछ नहीं किया वो हम  से सवाल पूंछते हें =शिवराज सिंह 

छतरपुर /
 आज से ठीक चार  साल पहले आज ही के दिन  हुए मतदान में मतदाताओं ने शिवराज को पुनः मुख्य मंत्री चुना था । आज के इस दिन ही बुंदेलखंड के नेता वा पूर्व मंत्री सुनील नायक की ह्त्या हुई थी । आज के इस ऐतहासिक दिन के समय मुख्य मंत्री शिवराज सिंह ने बुंदेलखंड की धरा पर केंद्र सरकार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कर , जनता से बीजेपी की सरकार के लिए समर्थन की अपील भी कर दी । उन्होने सवाल किया की जिनने 60 साल में कुछ नहीं किया वो शिवराज से सवाल पूछते हे ।

शिवराज सिंह मंगलवार खजुराहो के समीप राजनगर के सती माता मंदिर के प्रांगण में  आयोजित खंड स्तरीय अन्त्योदय मेला के कार्यक्रम में जन सभा को संबोधित कर रहे थे । उन्होने केंद्र सरकार पर  पहला निशाना बुंदेलखंड के विकाश के बहाने लगाया , उन्होने कहा की हमने तो छतरपुर में विश्व विद्यालय की, नोगांव में  घोषणा कर दी है  । इसके लिए बजट भी तय कर दिया है किन्तु केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय में विश्व विदालय का मसला लंबित है ., इसी तरह नोगाँव के इजीनियरिंग कालेज की स्वीकृति भारत सरकार के इ,आई,सी .टी, से अब तक नहीं मिली । किन्तु में बुंदेलखंड के लोगों के साथ हूँ मुझे इसके लिए कुछ भी करना पडेगा करूंगा । 
 वे यहीं नहीं रुके  उन्होने लगे हाथ ये घोषणा  भी कर डाली की किसानो को  समर्थन मूल्य पर अब सौ रूपए का और बोनस मध्य प्रदेश सरकार अगले साल से देगी । साथ ही उन्होने केंद्र सरकार को घेरा और कहा की डीजल के दाम बड़ा दिए खाद के बड़ा दिए तो अब किसानो के गेंहू के समर्थन मूल्य 1600 रुपये किया जाये \ उन्होने कहा की इसके लिए वे पत्र  भी केंद्र को लिखेंगे ।
मुख्य मंत्री शिवराज ने बुंदेलखंड की जनता के जख्मो पर अपनी वाणी का मलहम भी लगाया । उन्होने कहा की अपने पगड़ी पहना कर जो मान -सम्मान दिया है उसके लिए  में अपना सब कुछ न्योछावर कर दूंगा । बुंदेलखंड वर्षो  से गरीब और पिछड़े पन  का शिकार है । 60 वर्षों में इस इलाके के साथ बड़ा अन्याय हुआ है ।  इसके लिए सडको  का जाल बिछा दिया जाएगा । 2020 तक इस इलाके की 5 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित हो जाएगी । बुंदेलखंड के लिए 200 सिचाई योजनाओं पर काम चल रहा है ।मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके के बने बांधों से उत्तर प्रदेश जाते पानी को लेकर भी उन्होने कहा की एक-एक- बूंद पानी का हिसाब लिया जाएगा । उन्होने बुंदेलखंड में 600 करोड़ के एम्,ओ,यु, उद्योगों के लिए साइन होने  की बात भी कही । साथ ही दावा किया की आगामी पांच सालो में मध्य प्रदेश देश का न। वन राज्य बन जाएगा ।
राजनगर में अगले शैक्षणिक सत्र से महाविद्यालय खोलने की घोषणा मुख्यमंत्री श्री चौहान ने की ।उन्होंने  6 अरब 51 करोड़ 89 लाख 37 हजार रूपये लागत राशि के 74 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया।जिनमे 62 करोड़ 58 लाख रूपये लागत राशि के 23 विकास कार्यों का शिलान्यास एवं 5 अरब 89 करोड़ 21 लाख रूपये लागत राशि के 51 विकास कार्यों का लोकार्पण किया। उन्होंने अंत्योदय मेले के माध्यम से कुल 22 हजार 221 हितग्राहियों को 12 करोड़ 31 लाख 4 हजार रूपये राशि का लाभ पहुंचाया। लोकार्पित किये गये कार्यों में विशेषकर उन्होंने लगभग 550 करोड़ रूपये की लागत से निर्मित बरियारपुर बायाीं नहर परियोजना का उद्घाटन किया। इससे जिले में 43 हजार 850 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हो सकेगी। 

मुख्य मंत्री के साथ जल संसाधन मंत्री जयंत मलैया और कृषि मंत्री राम कृष्ण कुसमारिया भी थे । 
भीड़ जुटाने के लिए 
सभा में भीड़ जोडने के लिए प्रशासन ने खाश इंतजाम कए थे , जिले की आंगनवाडी कार्य कर्ताओं और आशा कार्य कर्ताओं के अलावा स्वयं सेवी संथाओं, वन समितियों  के लोगो को बुलाया गया था ।इसके लिए लोगों को पैसों का और भोजन का भी लालच दिया  था ।गाँव से आई रमिया(70), जुआ बाई(60),बिट्टी बाई (65) का कहना था की उसे पांच सौ रुपये और खाने के लिए भोजन का कह कर लाया गया ,पर यहाँ ना खाना मिला ना पैसा।घूरा  गाँव से गजिया कोरी(70 ) मोहनिया (61) पारवती(60),मुलिया (54) ने बताया की उसे 200-200 रुपये देने और खाना देने की बात कही गई थी पर यहाँ कुछ नहीं मिला ।

मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में उमड़ी बेरोजगारों की भीड़ - शिरोमणि स्वामी
खजुराहो -राजनगर में आयोजित अन्तोदय मेला के कार्यक्रम  में पधारे  मध्य प्रदेश के  मुख्यमंत्री - शिवराज सिंह चौहान के समक्ष जिले भर से आये बेरोजगार , बेरोजगारी के चलते अनेको प्रकार की समस्याओं को लेकर अपना -अपना आवेदन  हाथो में लिए हुए आश लगाये हुए बैठे मुख्यमंत्री से गुहार  लगाने की प्रतीक्षा में बैठे रहे ।, यह नजारा देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था, की इनका कोई नहीं है यारो , राम भारोसे मुख्यमंत्री से मिलने  की आस लगाये हुए थे ! यह देखने के बाद, मेरे मन में एक ऐसा द्रश्य आया  जब जनप्रतनिधी बनने के लिए घर -घर हाथ जोड़ते और पैर पड़ते और अनेको वादे करते तथा कसमे खाकर जनता की सेवा करने की शपथ लेते , लेकिन प्रतिनिधित्व हाथो में आते ही सब कुछ उल्टा हो जाता है !पहले जनता के पैर पड़ते है फिर जनता से पैर पड़वाये जाते है !पहले वादे करते है कि,मूलभूत सुख - सुविधाए आपके पास लेकर हम आयेगे का नारा लगाते  है! फिर बाद में वह अपने  चक्कर लगवाते है ! और मिलने का समय भी नहीं मिलता यह कैसा लुका - छिपी का खेल है इस खेल से बचने के लिए देश के हर व्यक्ति को जागरूक  होना अति आवश्यक है ! जागरूक व्यक्ति अपने अधिकारों तथा कर्यत्वो को समझ सकता है और मूलभूत सुख -सुविधाओ के लिए चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा ! वह अपने अधिकारों के तहत स्वालंबी बन सकता है!




15 नवंबर, 2012


मोनिया नृत्य और दिवारी गीतों के सिमित होते स्वर 
रवीन्द्र व्यास 
 कहते हैं विन्ध्य पर्वत मालाओंओ से घिरा  बुंदेलखंड का  यह अंचल वैसे   तो  अपने अभावों  और बदहाली के कारण जाना जाता है ।  इस बदहाल इलाके में ऐसी  कई परम्परा  और  और लोक साहित्य है जो  यहाँ की  अपनी एक अलग पहचान बनाता है ।पर काल के गर्त में धीरे- धीरे  ये परम्पराएं  समाप्त होती जा रहीं हें ।  ऐसी  ही एक परम्परा है  दिवारी गीत और नृत्य । दिवाली के दूसरे  दिन जहां इनके  ये दल हर गली और नुक्कड़ पर दिख जाते थे अब सिमित होते जा रहे हें ।
दिवारी  गीत  मूलतः चरागाही  संस्कृति के गीत ह़े , यही कारण है  की इन गीतों में  जीवन  का यथार्थ मिलता है । फिर चाहे  वह सामाजिकता हो,या धार्मिकता , अथवा श्रृंगार  या  जीवन का दर्शन । ये वे  गीत हें जिनमे  सिर्फ  जीवन की वास्तविकता के रंग हें ,  बनावटी  दुनिया से दूर , सिर्फ चारागाही संस्कृति  का प्रतिबिम्ब । अधिकाँश गीत  निति और दर्शन के हें । ओज से परिपूर्ण इन गीतों में विविध रसों की अभिव्यक्ति मिलती है । 
दिवारी गीत दिवाली  के दूसरे  दिन  उस समय गाये जाते हें जब  मोनिया मौन व्रत रख कर गाँव- गाँव  में घूमते  हें । दीपावली के पूजन के बाद मध्य रात्रि  में मोनिया -व्रत शुरू हो जाता है । गाँव के अहीर - गडरिया और पशु पालक तालाब नदी में नहा कर , सज-धज कर मौन व्रत लेते हें । इसी कारण इन्हे मोनिया भी कहा जाता है । इनके साथ चलते हें गायक और वादक , वादक अपने साथ ढोल ,नगड़िया और मंजीरा रखते हें ,तो कहीं -कही म्रदंग  और रमतूलों   का भी उपयोग होता है ।  गायक जब  छंद गीत का स्वर छेड़ता है तो वादक उसी अनुसार वाद्य यंत्र का उपयोग करता है । 
हालांकि मोनिया कोंड़ियों  से गुथे लाल रंग के जांघिये   और लाल पीले रंग की कुर्ती या सलूका अथवा बनियान  पहनते हें । जिस पर झूमर लगी होती है ,  पाँव में भी घुंघरू ,हाथो में मोर पंख  अथवा चाचर के दो डंडे का शस्त्र  लेकर जब वे चलते हें तो एक अलग ही अहशास होता है । मोनियों के इस निराले रूप और उनके गायन और नृत्य  को देखने  खजुराहों में विदेशी भी ठहर जाते हें । 
 दिवारी गीतों का चलन कब शुरू हुआ इसको लेकर अलग -अलग मान्यताएं हें ।  कुछ कहते हें की दिवारी गीतों का चलन 10वी . शत्दी में हुआ । तो कुछ का मानना है की द्वापर में कालिया के मर्दन के बाद ग्वालों ने श्री कृष्ण का असली रूप देख लिया था। श्री कृष्ण ने उन्हें गीता का ज्ञान भी  दिया था। गो पालकों को दिया गया ज्ञान वास्तव में गाय की सेवा के साथ शरीर को मजबूत करना था। श्री कृष्ण ने उन्हें समझाया कि इस लोक व उस लोक को तारने वाली गाय माता की सेवा से न केवल दुख दूर होते हैं बल्कि आर्थिक सम्बृद्धि का आधार भी यही है। इसमें गाय को 13 वर्ष तक मौन चराने की परंपरा है। आज भी यादव (अहीर) और पाल (गड़रिया) जाति के लोग गाय को न सिर्फ मौन चराने का काम करते हैं\
गांव के राम लाल यादव  का कहना है कि भगवान कृष्ण गोकुल में गोपिकाओं के साथ दीवारी नृत्य कर रहे थे, गोकुलवासी भगवान इंद्र की पूजा करना भूल गए तो नाराज होकर इंद्र ने वहां जबर्दस्त बारिश की, जिससे वहां बाढ़ की स्थिति बन गई। भगवान कृष्ण ने अपनी अंगुली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर गोकुल की रक्षा की, तभी से गोवर्धन पूजा  और दिवारी नृत्य की परम्परा चली आ रही है।पर अब यह परम्परा अब धीरे-धीरे  कम होती जा रही है । छतरपुर के रामजी यादव कहते हें की  अब गाँव ही सिमट रहे हें गो पालन अब घटता जा रहा है , इसे में अब गाय चराने वाले भी सिमित होते जा रहे हें । जिसका परिणाम है की  अब पहले की तरह ये दल नहीं दिखते हें । हालांकि कुछ लोग इस परम्परा को जीवित बनाए रखने का प्रयास कर रहें हें ।


विकास की उमंग और चुनौतियों के संघर्ष का बुंदेलखंड

  बुंदेलखंड की डायरी  विकास की उमंग और चुनौतियों के  संघर्ष का  बुंदेलखंड  रवीन्द्र व्यास  दो राज्य में बटे बुंदेलखंड के लिए    2025  में कई...