03 अक्टूबर, 2011

कुबेर का कुआँ




कुआँ  (कूप) /  लोगों की प्यास  बुझाने वाले कुआँ की कहानी भी कितनी अजीब है  | पहले कुआँ खुदवाकर लोग पुण्य कमाते थे | राजा अपनी प्रजा के लिए कुँए खुदवाते थे , ताकि उसकी प्रजा प्यासी ना रहे | लोग जब घर से निकलते थे तो अपने सामान के साथ लोटा ,डोरिया साथ रखते थे ताकि किसी कुँए पर अपनी प्यास बुझा सकें | दुनिया में कुआँ के महत्त्व का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है  की कुँए को लेकर कई तरह की कहावतें समाज में प्रचलित हें | 
बुंदेलखंड में एक इलाका है नोगांव यहाँ अंग्रेजों का पोलिटिकल एजेंट रहता था , उसने भी इस इलाके में कई कुँए बनवाये | 
समय बदला देश आजाद हो गया जनसेवक का तमगा लगा कर लोग देश चलाने लगे | पर उनका व्यवहार क्रूर राजा की तरह हो गया ठीक वेसे ही जैसे अंग्रेजो और लुटेरे मुगलों का रहा | दान धर्म से इन्हे भला क्या वास्ता ये तो स्वयं को भगवान् मानने लगे | इनकी दिलचस्पी पानी वाले कुआँ से ज्यादा तेल वाले कुँए के लिए हो गई | जनता जनार्दन की प्यास बुझाने के लिए इन्होने धरती के सीने पर अनगिनत छेद करवा दिए| बापू का नाम ले-ले कर गाँव में पंचायतें बनवा दी | पंचायतों को पंच  परमेश्वर के हवाले कर दिया | इन पर्मेश्वारों ने भी अपना  आदर्श जनसेवकों को मान लिया | जिन कुओं के खुदवाने से  पुण्य मिलता था ,ये वे कुँए ही डकारने लगे |
पिछले दिनों पन्ना में एक जनसेवक के भाई के द्वारा सात कुँए डकारने का मामला अभी निपटा भी नहीं था , की 
छतरपुर  जिले की काबर ग्राम पंचायत का कुआं का मामला सामने आ गया |  गाँव वालों के लिए यह कुआँ  रहस्यमय हो गया है | १९८३ -८४ में बना यह कुआँ अब तक बन रहा है | दरअसल यह कुआँ सरपंचों के लिए किसी कुबेर के खजाने से कम नहीं है |
१९८३-८४ में जब यह गाँव सीलोन पंचायत में आता था तब सरपंच परम लाल मिश्रा ने इसे १५ हजार की लागत से बनवाया था | 
१९९५- यह  गाँव एक अलग पंचायत हो गया , गाँव के सरपंच बने बालकिशन गौड़  जो २००४ तक रहे | इस दौरान इस कुँए के निर्माण पर मूलभूत और जे आर.वाई.योजना की राशि का ८५ हजार रुपये खर्चा दिखाया गया | 
२००७ में  यहाँ की सरपंच बनी कट्टु बाई अहिरवार  ,इसी योजना के तहत इसमे ४० हजार की राशि खर्च दिखाई गई 
२०१० में अब यहाँ के सरपंच बने हें हरिशंकर पटेल , उन्होने अब इसे नरेगा के तहत बनाने का फैसला किया है , इसके लिए उन्होने ३लाख ६ हजार का प्रस्ताव किया था | उनके प्रस्ताव को तकनिकी स्वीकृति  एस.ड़ी.ओ. पटेरिया ने दे दी है  | 
 जब हम इस गाँव में पहुंचे तो एक अजब नजारा देखने को मिला | बने बनाये कुँए को तोड़ा गया , उसमे लगी ईंटें बाहर निकाल ली गई | कुँए को चीपों से ढक दिया गया | 
अब सरपंच जी और एस.डी.ओ. और सचिव महोदय इस बने बनाये कुँए के नाम पर सरकार को ३लाख का छुना लगायेंगे | 
एसा नहीं की यह मामला जिले के मुखिया की जानकारी में ना हो , मुखिया जी को भी पता है किन्तु क्या करें वे भी जनसेवक के भय से भयभीत हें | आखिर पहली बार मुखिया बने हें कहीं मुखिया गिरी ना चली जाए |

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