18 अगस्त, 2011

अन्ना प्रकरण / जन से बड़ी नहीं हो सकती कोई संस्था


रवीन्द्र व्यास 
इन दिनों देश में जिस की सरकार है देखा जाये तो वह दोहरे मुखोटे वाली सरकार है | जिसका दिखाने का मुखोटा अलग है और करने का अलग | जिसे  लोकतांत्रिक व्यवस्था में यकीन करने वाली नहीं बल्की राजतांत्रिक व्यवस्था वाली सरकार कहा जा सकता  है | इसी लिए उसे लोक से और लोक आंदोलनों से अपने सिंहासन  पर कोई असर समझ नहीं आता | उसे अंग्रेजी हुकूमत की तरह इस तरह के जन आंदोलनों को कुचलने में ही आनंद आता है | पर इस बार उसका दाव उलटा पड़ गया , आजादी के  अहिंसक आन्दोलन की तर्ज पर शुरू हुए अन्ना के इस आन्दोलन ने सरकार की नीव हिलाकर रख दी |
रामदेव के आन्दोलन को कुचलने के बाद सत्ता के मद में चूर हो गई है  सरकार | यही कारण है की सरकार और कांग्रेस के परम ज्ञानी सलाहकारों ने जिन्हे आम जन से कभी कोई सरोकार ही नहीं रहा , ने अपनी ज्ञान की गठरी खोली और ऐसी -ऐसी नायब सलाह दी और दे रहे हें की सरकार की हालत देखते ही बनती है | जिसका परिणाम ये हुआ की देश की जनता ने देखा की ये कैसी सरकार है जो सामने -सामने कहती कुछ है और करती कुछ है | और बेशर्म इतनी की उसे अपने इस दोहरे चरित्र पर कोई शर्म भी नहीं है |
अन्ना हजारे ने जब तपती दोपहर में जंतर -मंतर पर  जन लोकपाल के लिए अनशन किया तो सरकार की नींद उडी , उसके मंत्रियों ने वायदा किया की लोकपाल बिल संसद में रखा जाएगा | जिसमे जनता के लोगों को भी रखा जाएगा | इस मसले को लेकर कई दौर की बातचीत तब तक ठीक ठाक चलती रही जब तक सरकार ने रामदेव के आन्दोलन को कुचल नहीं दिया |  इसके बाद सरकार के मंत्री और प्रवक्ता तो मानो अपने को सुपर पावर समझने लगे | सत्ता बल के  मद में चूर होकर इन लोगों ने दिखावटी लोकपाल बिल संसद में रखा जिसे स्टेंडिंग कमेटी  को सोंपा गया है ,| इस कागजी लोकपाल के विरोध में जब अन्ना ने आमरण अनशन की घोषणा की तो सरकार के कपिल सिब्बल ,पी.चिदम्बरम ,जैसे  इन्ही ज्ञानी सलाहकारों ने फिर सलाह दे डाली   |
सरकार के मंत्रियों और कांग्रेस के ज्ञानियों की सलाह कितनी बेहतर रही होगी ये सब देश की जनता अब देख रही है | लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों के विरोध के अधिकार पर अंग्रेजों की तरह पाबंदी लगा दी , | अन्ना हजारे के प्रति अपमानजनक आरोप लगाये , हद तो तब हो गई जब उन्हे उनके ही घर से गिरफ्तार कर लिया गया | इसके बाद सरकार को शायद ये उम्मीद थी की जन मानस उग्र हो जाएगा और हम उस पर अपनी खाकी वर्दी वाली फोज से हमला कर नेस्तनाबूद कर देंगे | पर अन्ना के सन्देश को लोगों ने स्मरण रक्खा और अहिंसात्मक तरीके से सड़कों पर आ गए | सारे देश के लोग सड़कों पर , अन्ना के लिए लोग तिहाड़ जेल के बाहर बैठे ,हजारों  की संख्या में लोग इंडिया गेट पर जुटे | पर कहीं हिंसा का रत्ती मात्र नजारा देखने को नहीं मिला | 
ये सब देख कर हैरान सरकार के मुखिया और उसके संचालन कर्ताओं ने  इस आन्दोलन के पीछे अमेरिका का हाथ बताने से भी परहेज नहीं किया | शायद उन्हे लगा होगा की आर.एस.एस. का हाथ कहना लोगों को हजम नहीं होगा  | सब ओर से हारकर सरकार ने बुधवार की रात  अन्ना को रामलीला मैदान में १५  दिनों की अनुमति दी है | एक बच्चे ने सवाल किया की अंकल हमे अब तक ये समझ नहीं आ रहा की सरकार संसद में कहती है की हम भ्रष्टाचार के विरोध में हें , फिर उसने अन्ना की बात क्यों नहीं मानी , क्या अन्ना ने भ्रष्टाचार के दायरे में सब को लाने की बात कह कर कुछ गलत कर दिया था ? जिसके कारण उन्हे पकड़ लिया  गया | हमने उसी बालक से पूंछ लिया की बेटा तुम्ही बताओ  की तुम्हे गलत कौन लगता है , हमे तो इसमे सरकार बेवकूफ लगती है | 
लोकपाल बिल को लेकर सियासत भी केसे -कैसे रंग दिखाती है , | जो राजनैतिक दल इस मसले पर गोलमोल जबाब दे रहे थे वे भी  भ्रष्टाचार के मुद्दे पर लोगों के जन आक्रोश को देख कर सरकार पर हमला करने से नहीं चूके | जन दबाव ने ये साबित कर दिया है की कोई भी सत्ता जन मानस से ऊपर नहीं हो सकता \

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