21 फ़रवरी, 2011

: humen story


त्रासदी 
आयोग के निर्देशों को नाहीं मानती मध्य प्रदेश सरकार 
रवीन्द्र व्यास 

 ७० साल का वृद्ध जगदीश साहू उन बदनसीबों में से एक है  जिसे अपने ही जवान बेटे की अर्थी को कंधा देने को मजबूर होना पडा था | पिछले  ६ साल  से वह अपने बेटे के हत्यारे पुलिस वालों को सजा दिलाने के लिए भटक रहा है | मध्य प्रदेश मानव अधिकार आयोग से मिला अधूरा न्याय  भी न्याय प्रिय  बी.जे.पी.सरकार की फाइलों में दफ़न हो कर रह गया है |
 नोगांव  निवासी उमेश साहू को पुलिस ने ३ जून ०६ की सुबह उसके ही घर से पकड़ा था |उसे यह कह कर पुलिस लाइ थी की सी.एस.पी. साहब को कुछ पूछ तांछ  करनी है दो घंटे में छोड़ देंगे | तत्कालीन सी.एस.पी. प्रमोद सिन्हा की गाडी से उसे छतरपुर कोतवाली लाया गया |पुलिस ने मानवता की सारी हदें पार करते हुए  उसे जानवरों की तरह पीटा, उसके गुप्तांग में कोकोकोला की बोतल डाली गई , जब इससे भी वर्दी वालों को संतोष नहीं हुआ तो पेट्रोल डाला गया | ४ जून की रात  उसकी धर्मेंद्रा सोनी के साथ गाँजा रखने के आरोप में छतरपुर के कुंदन लोज के पास से  गिरफ्तारी दिखाई |  ५ जून को उसे न्यायालय में पेस कर जेल भेज दिया गया |
जेल में उसका स्वास्थ्य परीक्षण नहीं किया गया ,और ना हीं उसके शरीर पर आई चोटों के निशान लिखे गए |हालात जब ज्यादा गंभीर हो गई  और उसके एनल एरिया से मवाद बहने के कारण बदबू आने लगी <तब २० जून को उसे अस्पताल भेजा गया ,जहां उसकी मोत हो गई |
प्रमुख सचिव मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने अपने पत्र क्र .२५७६४ दि.२०/१०/१० को इस मामले की जांच रिपोर्ट अपनी अनुशंषा के साथ प्रमुख सचिव मध्य प्रदेश शासन गृह (पुलिस) मंत्रालय  भोपाल को भेजी |पत्र में आयोग ने स्पष्ट किया की प्रमोद सिन्हा तत्कालीन नगर  पुलिस अधीक्षक छतरपुर ,राकेश तिवारी (प्रधान आरक्षक ) जितेन्द्र सिंह (आरक्षक), पर मानव अधिकार हन्नान के लिए अभियोजन की कार्यावाही की जाए  वा  उनके विभागीय  जांच की अनुशंषा की ,साथ ही उमेश साहू के आश्रितों को शासन ३ लाख की अंतरिम  छति पूर्ति  राशि प्रदान करे | शासन यदि चाहे तो यह राशी आरोपियों से वसूल कर सकता है |
आयोग ने अपने पत्र में स्पष्ट किया था की अभियोजन ,विभागीय जांच ,संस्थित करने एवं मृतक के आश्रितों को अंतरिम छतिपूर्ति राशि अदा करने सम्बन्धी अनुशंषा एक माह में पूर्ण की जाए | आयोग के इस आदेश के बावजूद भी मध्य प्रदेश की जनहितकारी सरकार ने पीड़ित पक्छ को न्याय दिलाने की दिशा में कोई कार्यावाही नहीं की |आयोग ने ९ दिसम्बर को पुनः सरकार को स्मरण पत्र लिखा है | 
इस सारे मामले के पीछे की कहानी और  बाद की कहानी तंत्र के गिरोह तंत्र को उजागर करती है | उमेश साहू के पिता जगदीश साहू बताते हें  कि उमेश ने ०६-०७ के भाँग-घोंटा का ठेका  पहली बार उमेश ने लिया था | उसके इस ठेका लेने से नोगांव के वे लोग खाशे नाराज हो गए जो  अवेध रूप से गांजा बेंचने का कार्य वर्षों से करते आ रहे थे | इन लोगों से २ जून को उमेश झगडा 
भी हुआ था | अवेध काम करने वाले इन लोगों के सम्बन्ध पुलिस से काफी याराना थे | इसी के कारण पुलिस ३ जून को उमेश को वर्दी वाले गुंडों कि तर्ज पर उठा ले गई , और उसे इतना पीटा कि उसकी मोत हो गई |
उमेश कि मोत के बाद पुलिस प्रशासन ,जिला प्रशासन ने जिस तत्परता से आरोपी वर्दी धारियों को बचाने कि योजना बनाई उसकी मिशाल मिलना मुश्किल है | जिला प्रशासन ने मामले कि मजिस्ट्रियल जांच एस.ड़ी.एम्. छतरपुर से ,पुलिस जांच एस.ड़ी.ओ.पी. यू.एस.सिकरवार ,और एड्ड.एस.पी. ओ.पी.त्रिपाठी तथा जेल विभाग ने जेल उपमहानिरीक्षक से जांच कराइ | सभी जांच रिपोर्टों में पुलिस कर्मियों को बेदाग़ बताया गया |
जगदीश साहू कहते हें कि मेरे बेटे कि मोत के बाद से मेरी पत्नी भी अब बीमार रहने लगी है | बच्चे भी अब वर्दी वालों को देख कर दर जाते हें | मेरा सारा कारोबार चोपट हो गया है , मेरी जिंदगी कि सिर्फ यही तमन्ना रह गई है कि अपने बेटे के हत्यारों को सजा दिला सकूँ ,ताकि फिर कोई वर्दी वाले गुंडे किसी के बेटे किसी के भाई ,किसी के पति,किसी के पिता को ना मार सकें | 

04 फ़रवरी, 2011

Dance Festival




खजुराहो  की तीसरी शाम यास्मिन सिंह के नाम
संसार सारं सदा वसंतम
रवीन्द्र व्यास
खजुराहो डांस फेस्टिवल की तीसरी शाम  की शुरुआत प्रख्यात न्रत्यांगना लीना नंदा के ऑडसी नृत्य से हुई , पर इस शाम कत्थक
न्रत्यांगना यास्मिन सिंह वा आरती सिंह  की मनमोहक और भाव पूर्ण प्रस्तुति ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा | तीसरी और आखरी प्रस्तुति ज्योत्सना जगन्नाथन के भरतनाट्यम की हुई |
कथक  शास्त्रीय न्रत्य की ऐसी विधा है जिसमे  कथा के कथानक पर नृत्य की भाव पूर्ण प्रस्तुति दी जाती है | रायपुर से आई यास्मिन सिंह ,और आरती सिंह के ग्रुप ने  ये प्रस्तुतियां  दी | जिसमे अनादी अनंत प्रभु की लीलाओं को विशुद्ध गीत की बंदिशों के साथ पेश किया | राजगढ़  घराने की कत्थक
न्रत्यांगना  यास्मिन सिंह वा आरती सिंह ने शिव आराधना के साथ नृत्य पेश किया | ठाट ,सवाल जबाब ,ठुमरी ,मध्यलय, गंगा अवतरण , आदि की प्रस्तुतियां दी | उन्होने द्रोपदी के चीर हरण के प्रसंग की प्रस्तुति दे कर दर्शकों को वाह वाह कहने पर मजबूर कर दिया|
घोडे की चाल ,हिरन की चाल , के बाद  गत निकाश की प्रस्तुति दी , जिसमे उन्होने श्री कृष्ण की गत ,मयूर की गत की कैसे  बादलों की पहली बूंद जमीन पर गिरती है और मयूर मिटटी की सोंधी खुसबू से कैसे  भाव विभोर हो कर  नाच उठता है  | एसा चित्रण था मानो स्वयं  मयूर मंच  पर आ गया हो | रुक्शार की गत  जिसमे हाथ की मुद्रा बनाकर तबले के साथ चलना होता है |  उनके साजिंदों ने भी उनका भरपूर साथ दिया , |
श्रीमती यास्मिन सिंह ने  इसे अपने लिए गोरव पूर्ण छड  बताया , उनका कहना है की पहली बार इस अंतरराष्ट्रीय  मंच पर प्रस्तुति देने का मौक़ा  मिला है, जिसकी अभिलाषा हर कलाकार की होती है | उनका मानना है की आज भी शास्त्रीय नृत्य शास्वत वा सत्य  है जिसे हर कोई पसंद करता है |
कार्यक्रम के प्रारम्भ में उस्ताद अलाउदीन खान संगीत एवं कला अकादमी के श्री तेलंग ने यास्मिन सिंह ,आरती सिंह,और आर.पी. सिंह का सम्मान किया |


03 फ़रवरी, 2011

( khajuraho Dance)

खजुराहो नृत्य समारोह
मेरा सपना था इस मंच पर प्रस्तुति देने का *= हेमा मालिनी
 रवीन्द्र व्यास
खजुराहो में शास्त्रीय न्रत्यो के सात दिवसीय   महा कुम्भ में नृत्य समारोह का आगाज मंगलवार की शाम फिल्म अभिनेत्री हेमामलनी और उनकी बेटिया ईसा व आहना देवल के ओडिसी नृत्य के साथ हुआ ,| छत्तीसवे अंतर्राष्टीय नृत्य उत्सव का शुभारम्भ मध्य प्रदेश सरकार के संस्कृति मंत्री लक्ष्मी कान्त शर्मा ने द्वीप प्रज्जलित कर किया
इस  विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी में कला और संस्कृति को नया आयाम देने के लिए खजुराहो नृत्य समारोह का आयोजन किया जाता है|  देश के कोने - कोने से आये कलाकार अपनी नृत्य कला को प्रस्तुत कर अपने जीवन को धन्य बनाते है , उन्ही कलाकारों में से एक है फिल्म अभिनेत्री हेमामालनी जिन्होने  अपने  नृत्य साधना के इतिहास में खजुराहो के इस मुक्ताकाशी मंच पर पहली बार कला का जोहर अपनी दोनों बेटियों के साथ दिखाया | और स्वीकारा की  खजुराहो नृत्य समारोह प्राचीन काल से चला आ रहा है ,अभी तक अच्छी  तरह से कायम  रखा हुआ है , इस नृत्य समारोह में भाग लेना ही गर्व की बात है  बहुत ही सुन्दर सा अहशास होता है , कई नर्र्त्यांगना  इसके लिए वर्षों प्रेक्टिश करती हें | और कहती  हें मुझे खजुराहो नृत्य समारोह में भाग लेने को मिल जाये  |
  बहुत साल पहले मुझे भी इक्छा थी यहाँ डांस  करने की  ,लेकिन मुझे कभी यहाँ  डांस  का मोका नहीं मिला , मेरे से मेरी बेटियां ज्यादा लकी हें जिन्हें कुछ साल पहले यहाँ डांस  करने का मोका मिला , मुझे आज ये मोका मिला |
 नृत्य समारोह का शुभारम्भ करने पहुचे मद्य प्रदेश के संस्कृति मंत्री लक्ष्मी कान्त शर्मा ने अंतर्राष्टीय ख्याति प्राप्त खजुराहो नृत्य समारोह को समय के अनुसार विकसित करने की बात कही | उनका कहना है  की हेमा मालिनी सदी की महान कलाकार हें , सब चाहते थे की हेमा जी यहाँ आयें ,और कार्यक्रम की प्रस्तुति दें | तीन वर्ष पहले हमने यह तय किया था की हेमा जी यहाँ आयें | वो दिन आज साकार हुआ है |  यह मध्य प्रदेश के लिए पहला अवसर होगा | हमने देखा की समारोह का समय ठीक नहीं है इसलिए इसे एक माह पहले आयोजित किया गया है | अब हम देख रहे हें की मंच की व्यवस्था को सुधारना होगा ,विशिस्ट दीर्घा भी होना चाहिए | आगे इसके लिए प्रयाश किये जायेंगे |
समारोह की पहली शाम हेमा मालनी और उनकी बेटिया ईसा व आहना देवल के ओडिसी नृत्य के नाम रही |

1975 se खजुराहो नृत्य समारोह क़ी शुरुआत क़ी गई थी | इसका मकसद यहाँ विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करना था | पहले यह मंदिरों के के मध्य हुआ करता था | बाद में इसे मंदिर परिसर से बाहर किया जाने लगा | पिछले काफी समय से इसमें दर्शक तक जुटना मुश्किल हो रहा था \ जिसके चलते इसे फरवरी माह में किया जाने लगा | पर इसका भी कोई  असर इस शास्त्रीय नृत्य समारोह पर नहीं हुआ | इसी के चलते फिल्म अभिनेत्री हेमा मालिनी को मंच  प्रदानं किया गया | ड्रीम गर्ल क़ी झलक पाने के लिए दर्शक बेताब रहे |
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विकास की उमंग और चुनौतियों के संघर्ष का बुंदेलखंड

  बुंदेलखंड की डायरी  विकास की उमंग और चुनौतियों के  संघर्ष का  बुंदेलखंड  रवीन्द्र व्यास  दो राज्य में बटे बुंदेलखंड के लिए    2025  में कई...